मैंने कभी नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया’: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मानवता-विरोधी अपराधों के आरोप खारिज किए

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 में विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई को लेकर लगे गंभीर आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया है। बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा बलों को नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब ढाका में एक विशेष न्यायाधिकरण इस बहुचर्चित मामले में अपना फैसला सुनाने वाला है।

हसीना, जिन्हें अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बीच सत्ता से हटाया गया था, पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा बलों को सीधे निर्देश देते हुए कार्रवाई चलाई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ मृत्युदंड की मांग की है।

“फर्जी मुकदमा, राजनीतिक साजिश”: हसीना का आरोप

बीबीसी से ईमेल इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ चल रहा मुकदमा “एक फरेब” है, जिसे “राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा नियंत्रित कंगारू कोर्ट” चला रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा प्रक्रिया उन्हें दोषी ठहराने के लिए पहले से ही तय की गई है।

ढाका में सोमवार को आने वाले फैसले से पहले सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। देशभर में इसे एक निर्णायक पल माना जा रहा है—विशेषकर उन परिवारों के लिए जिन्होंने आंदोलन में अपनों को खोया।

1,400 मौतों के आरोप, पर हसीना का सख्त इनकार

यूएन मानवाधिकार जांचकर्ताओं का कहना है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के लिए व्यवस्थित, घातक बल का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 1,400 तक लोगों की मौत हुई। जांच में दावा किया गया कि हसीना ने सीधे तौर पर सुरक्षा एजेंसियों को आदेश दिए थे।

हालांकि, उन्होंने इसे “पूरी तरह झूठा” बताया।
हसीना ने कहा:

“मैं यह नहीं कह रही कि हालात नियंत्रण से बाहर नहीं गए या अनावश्यक रूप से जानें नहीं गईं, लेकिन मैंने कभी भी निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया।”

इससे पहले, एक कथित फोन कॉल की लीक ऑडियो कोर्ट में सुनाई गई थी, जिसमें हसीना को “घातक हथियारों” के इस्तेमाल की अनुमति देते हुए सुना गया था। वह रिकॉर्डिंग ही मुकदमे की मुख्य कड़ी मानी जा रही है।

पूर्व मंत्री और पुलिस प्रमुख भी आरोपी

हसीना के साथ पूर्व गृहमंत्री असदुज्ज़मान खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामुन को भी आरोपित किया गया है। कमाल फिलहाल फरार हैं, जबकि अल-मामुन ने जुलाई में दोष स्वीकार कर लिया था, हालांकि सजा अभी तय नहीं हुई है।

हसीना का कहना है कि उन्हें वकील रखने या अपनी तरफ से सफाई देने का मौका भी नहीं मिला। उनके अनुसार, उनके विरोधी Awami League को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे फरवरी में होने वाले चुनाव में पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है।

उनकी कानूनी टीम ने संयुक्त राष्ट्र में तत्काल अपील दायर की है, जिसमें निष्पक्ष ट्रायल और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

गायब होने, गुप्त जेलों और मुठभेड़ों पर सवाल

इंटरव्यू में हसीना से उनके लंबे कार्यकाल में कथित जबर्दस्ती गायब करने, गुप्त जेलों और फर्जी मुठभेड़ों पर भी सवाल पूछे गए। सत्ता से हटने के बाद कई ऐसे गुप्त हिरासत केंद्रों का खुलासा हुआ, जहां लोगों को वर्षों तक बंद रखने के आरोप लगे।

हसीना ने इन आरोपों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे किसी केंद्र की जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा:

“मेरी व्यक्तिगत भूमिका इन घटनाओं में नहीं है। लेकिन यदि किसी अधिकारी द्वारा दुरुपयोग के सबूत हैं, तो निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक जांच होनी चाहिए।”

हसीना और उनकी पूर्व सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों का भी सामना कर रहे हैं, जिनका वे खंडन करती हैं।

ढाका की राजनीति में आने वाला फैसला न केवल हसीना के राजनीतिक भविष्य बल्कि बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

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