ईरान का साफ संदेश: शांति चाहिए, लेकिन शर्तों के साथ
Mediawali news
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच अली खामेनेई के करीबी माने जाने वाले अधिकारी मोहम्मद हुसैन जियानिया ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन किसी भी कीमत पर अपने सम्मान से समझौता नहीं करेगा।
एक टीवी इंटरव्यू में जियानिया ने कहा कि यह युद्ध ईरान ने शुरू नहीं किया, बल्कि यह उस पर थोपा गया है। उनके मुताबिक अमेरिका और इजरायल को यह बताना चाहिए कि वे लड़ाई कब खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग शांति चाहते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा और गरिमा सबसे पहले है।
जियानिया ने भावुक होते हुए बताया कि ईरान के लिए खामेनेई की मौत बहुत बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे पूरे देश ने अपने पिता को खो दिया हो। उनके अनुसार, खामेनेई सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि पूरे देश के लिए एक मार्गदर्शक थे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युद्ध के दौरान आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थानों पर हमलों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अंतिम संस्कार करने में भी डर लग रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग डरे नहीं हैं और मजबूती से खड़े हैं।
इस बीच, ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा था। इसमें प्रतिबंधों में ढील, परमाणु कार्यक्रम पर रोक, मिसाइलों की सीमा तय करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना जैसी शर्तें शामिल थीं।
लेकिन ईरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। उसका कहना है कि वह अपने मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन जैसे मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा, क्योंकि यह उसकी सुरक्षा से जुड़े हैं।
कुल मिलाकर, ईरान का रुख साफ है—वह युद्ध खत्म करना चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों पर। ऐसे में सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंच पाएंगे या यह संघर्ष और लंबा चलेगा। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई हैं।