मोबाइल का खौफ: बिना कॉल के भी फोन बजने का भ्रम, युवाओं में बढ़ती मानसिक बीमारी

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फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम बना युवाओं के लिए नई चुनौती

मोबाइल फोन आज युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग अब एक नई मानसिक समस्या को जन्म दे रहा है। विशेषज्ञ इसे फोन फोबिया या फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम कह रहे हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को बिना किसी कॉल, मैसेज या नोटिफिकेशन के भी फोन बजने या वाइब्रेट होने का भ्रम होता है।

जिला अस्पताल की मनोवैज्ञानिक डॉ. स्वाति त्यागी के अनुसार, अनौपचारिक सर्वे में सामने आया है कि 70-75 प्रतिशत युवा हर पांच मिनट में मोबाइल चेक करते हैं, जबकि 60 प्रतिशत युवाओं को फोन हाथ में न होने पर बेचैनी होती है। वहीं, हर 10 में से 4 युवा नींद की समस्या से जूझ रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में मोबाइल से जुड़ी मानसिक समस्याओं के मामले ओपीडी में लगभग दोगुने हो गए हैं।

मोबाइल की लत से बिगड़ती जिंदगी की सच्ची कहानियां

  पढ़ाई से ज्यादा फोन की दुनिया में कैद

20 वर्षीय कॉलेज छात्र राहुल (बदला हुआ नाम) पढ़ाई के दौरान हर कुछ मिनट में मोबाइल चेक करता था। धीरे-धीरे उसे ऐसा लगने लगा कि फोन बार-बार वाइब्रेट हो रहा है, जबकि कोई कॉल या मैसेज नहीं आता था। फोन दूर रखने पर उसे बेचैनी और घबराहट होने लगी। रात में नींद नहीं आती थी और दिन में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता था। मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और डिजिटल डिटॉक्स के बाद उसकी स्थिति में सुधार देखा गया।

 फोन से दूरी बनते ही घबराहट

18 वर्षीय स्कूल छात्रा नेहा (बदला हुआ नाम) सोशल मीडिया और चैटिंग की अत्यधिक आदी थी। जब फोन पास नहीं होता तो उसे बेचैनी, पसीना और घबराहट महसूस होती थी। वह बार-बार बिना वजह मोबाइल स्क्रीन देखने लगी थी, जिससे उसकी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा। काउंसलिंग के दौरान उसे डिजिटल ब्रेक और समय प्रबंधन सिखाया गया, जिसके बाद उसकी एकाग्रता और मानसिक स्थिति में सुधार आया।

 रील स्क्रॉलिंग ने बिगाड़ दी दिनचर्या

21 वर्षीय प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अमित (बदला हुआ नाम) ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ सोशल मीडिया पर घंटों रील स्क्रॉल करता था। फोन से दूरी होने पर उसे लगता था कि कोई कॉल आ रहा है या मैसेज आया है। वह खाना खाते समय, वॉशरूम और सोते समय भी फोन हाथ में रखने लगा। डॉक्टरों ने इसे फोन फोबिया और डिजिटल एडिक्शन बताया और डिजिटल डिटॉक्स थेरेपी शुरू कराई।

युवाओं में दिख रहे प्रमुख लक्षण
  • बिना बजे मोबाइल का एहसास

  • बार-बार फोन चेक करना

  • फोन न होने पर बेचैनी

  • नींद की समस्या

  • पढ़ाई में मन न लगना

  • चिड़चिड़ापन

  • सामाजिक दूरी

  • मानसिक तनाव

फोन फोबिया से बचाव के उपाय
  • मोबाइल इस्तेमाल का समय तय करें

  • सोने से पहले फोन का प्रयोग न करें

  • गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद रखें

  • योग और खेल-कूद को दिनचर्या में शामिल करें

  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं

  • पढ़ाई या काम के समय फोन दूर रखें

  • नियमित डिजिटल ब्रेक लें

  • जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक से सलाह लें

मुख्यमंत्री योगी का युवाओं को संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को पत्र लिखकर मोबाइल के संतुलित उपयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग शिक्षा, नवाचार और विकास के लिए होना चाहिए, न कि आदत या लत के रूप में। उन्होंने युवाओं से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

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