जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में रोजाना मोतियाबिंद का हो रहा ऑपरेशन
500 से अधिक लोगों के जीवन में एक बार फिर रोशनी
Mediawali news, Noida
जिला अस्पताल में इन दिनों आंखों की बीमारियों के मरीजों की संख्या में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी देखने को मिली है। अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार मोतियाबिंद के मामलों में विशेष रूप से इजाफा हुआ है। यही कारण है कि जिला अस्पताल में रोजाना लगभग 25 से 30 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सतेंद्र कुमार ने बताया कि सिर्फ जनवरी माह में 500 से अधिक मरीजों को सफल ऑपरेशन किया गया है। वहीं नवंबर व दिसंबर में इसकी संख्या 1500 से अधिक में पहुंची है। इस सीजन में डॉक्टर पर भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। वहीं जिला अस्पताल में हाल ही में एक नेत्र विशेषज्ञ का कार्यकाल पूरा होने के बाद वह अस्पताल से चली गई हैं। फिलहाल, यह जिम्मेदारी अब तीन से दो डॉक्टर के पास आ गई है। डॉ. कुमार कहते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ मोतियाबिंद की समस्या आम हो जाती है, लेकिन अब अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि धूल, धूप, मधुमेह, हाई बीपी और आंखों की उचित देखभाल न करने से भी आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख के लेंस पर धुंधलापन आ जाता है, जिससे देखने में परेशानी होती है। समय पर इलाज न होने पर मरीज की देखने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। हालांकि आधुनिक तकनीक से होने वाले ऑपरेशन के जरिए मरीजों की रोशनी दोबारा लौटाई जा सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के कारण रोजाना बड़ी संख्या में सफल ऑपरेशन किए जा रहे हैं। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों की आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी शिकायतें आम हैं।
वहीं नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 150-200 से अधिक मरीज आंखों से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं।अस्पताल परिसर में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। ओपीडी के बाहर रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर डॉक्टर के ओपीडी तक मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ बनी रहती है। कई मरीज दूर की क्षेत्रों से सुबह-सुबह अस्पताल पहुंच जाते हैं, ताकि समय पर जांच और इलाज मिल सके।
आंखों को कैसे बचाए
विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम, स्क्रीन का अधिक उपयोग और प्रदूषण भी आंखों की समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। बचाव के उपायों की बात करें तो डॉक्टरों का कहना है कि आंखों की नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है, खासकर 40 साल की उम्र के बाद। धूप में निकलते समय सनग्लास का उपयोग करें। पौष्टिक आहार लें जिसमें हरी सब्जियां और विटामिन ए शामिल हों। मधुमेह और हाई बीपी के मरीज अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच कराएं। इसके अलावा मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखें और हर 20 मिनट में आंखों को आराम दें।
जागरूकता और समय पर उपचार से मोतियाबिंद सहित अधिकांश आंखों के रोगों से बचाव संभव है। जिला अस्पताल में बढ़ती मरीज संख्या यह दर्शाती है कि लोगों में इलाज के प्रति जागरूकता तो बढ़ी है, लेकिन साथ ही आंखों की बीमारियों के प्रति सावधानी बरतना भी उतना ही आवश्यक है।
– डॉ. सतेंद्र कुमार, नेत्र विशेषज्ञ, जिला अस्पताल