फिल्म समीक्षा: ‘इक्कीस’: 2026 की एक मजबूत शुरुआत, युद्ध के खिलाफ एक संवेदनशील फिल्म

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साल 2026 की शुरुआत फिल्म ‘इक्कीस’ से काफी प्रभावशाली तरीके से हुई है। अगस्त्य नंदा और दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की यह फिल्म एक युद्ध आधारित कहानी है, लेकिन यह आम युद्ध फिल्मों से अलग है। ‘इक्कीस’ केवल लड़ाई और वीरता नहीं दिखाती, बल्कि युद्ध के दर्द, नुकसान और उसके मानवीय प्रभाव पर गहराई से ध्यान देती है। फिल्म की कहानी एक युवा सैनिक के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अगस्त्य नंदा ने निभाया है। यह किरदार देशभक्ति से भरा है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, वह युद्ध की सच्चाई को समझने लगता है। अगस्त्य नंदा ने अपने अभिनय से यह दिखाया है कि एक युवा कैसे सपनों और डर के बीच जूझता है। यह उनके करियर की एक मजबूत और परिपक्व शुरुआत मानी जा सकती है।

धर्मेंद्र फिल्म में एक अनुभवी और भावनात्मक भूमिका में नजर आते हैं। उनका अभिनय फिल्म को गहराई देता है। कम स्क्रीन टाइम में भी वे दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। उनके संवाद और भावनाएं कहानी को और ज्यादा असरदार बनाती हैं। फिल्म का निर्देशन संतुलित है। निर्देशक ने युद्ध के दृश्य दिखाने के बजाय उसके परिणामों पर ज्यादा फोकस किया है। यही वजह है कि ‘इक्कीस’ एक एंटी-वॉर फिल्म बनकर उभरती है। फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या युद्ध वास्तव में किसी समस्या का समाधान है।

फिल्म का संगीत कहानी के साथ पूरी तरह मेल खाता है और भावनात्मक दृश्यों को मजबूत बनाता है। सिनेमैटोग्राफी भी प्रभावशाली है, जो दर्शकों को कहानी से जोड़े रखती है। कुल मिलाकर, ‘इक्कीस’ एक सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म है। यह देशभक्ति के साथ-साथ शांति का संदेश देती है। मजबूत अभिनय, संवेदनशील कहानी और अलग दृष्टिकोण के कारण यह फिल्म 2026 की एक यादगार शुरुआत कही जा सकती है।

navya seth
navya seth
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