धुरंधर 2’ रिव्यू: रणवीर सिंह का दमदार प्रदर्शन, लेकिन लंबी कहानी में ढीली पकड़
Mediawali news
फिल्म कैसी है?
रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ का इंतजार फैंस लंबे समय से कर रहे थे। फिल्म निराश नहीं करती, लेकिन करीब 4 घंटे की लंबाई बीच-बीच में आपको थका देती है। शुरुआत और क्लाइमैक्स मजबूत हैं, मगर बीच का हिस्सा कमजोर पड़ता है। जहां पहले पार्ट की कसावट दर्शकों को बांधे रखती थी, वहीं इस बार कहानी कई जगह खिंचती हुई महसूस होती है।
कहानी
फिल्म की कहानी छह चैप्टर्स में बंटी है। जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) के अतीत से शुरू होकर कहानी उसके बदले की जंग तक जाती है। जेल की सजा के बाद आईबी डायरेक्टर अजय सान्याल (आर माधवन) उसे देश के लिए काम करने का मौका देते हैं। पाकिस्तान में हमजा अली मजारी बनकर उसकी एंट्री होती है और कहानी आगे बढ़ती है।
पहले पार्ट के बाद की कहानी में रहमान डकैत की मौत के बाद की घटनाएं दिखाई गई हैं। राजनीतिक और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन दिलचस्प हैं, लेकिन कई ट्विस्ट पहले से ही अनुमानित लगते हैं।
अभिनय
पूरी फिल्म में रणवीर सिंह छाए रहते हैं और उनका प्रदर्शन शानदार है। गुस्सा, इमोशन और एक्शन—हर पहलू में वे मजबूत नजर आते हैं।
अर्जुन रामपाल को ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन उनका किरदार उतना प्रभावी नहीं बन पाया।
संजय दत्त सीमित भूमिका में हैं।
वहीं आर माधवन और राकेश बेदी फिल्म में जान डालते हैं, खासकर क्लाइमैक्स में।
निर्देशन
आदित्य धर का रिसर्च और डिटेलिंग काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने वास्तविक घटनाओं को कहानी से जोड़ने की कोशिश की है, जो दिलचस्प लगती है। हालांकि, इस बार कहानी में टाइटनेस और सरप्राइज की कमी साफ दिखती है। कई सीन लंबे और खिंचे हुए लगते हैं, जिससे फिल्म की रफ्तार प्रभावित होती है।
संगीत
फिल्म का म्यूजिक पहले पार्ट के मुकाबले कमजोर है। गाने याद नहीं रह जाते और एक रोमांटिक ट्रैक जबरन जोड़ा हुआ लगता है।
देखें या नहीं?
अगर आपने पहला पार्ट पसंद किया था, तो ‘धुरंधर 2’ एक बार जरूर देख सकते हैं। लेकिन ज्यादा उम्मीदों के साथ थिएटर न जाएं। यह एक ठीक-ठाक एंटरटेनर है, जो रणवीर सिंह की दमदार एक्टिंग के लिए देखा जा सकता है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले में कमी इसे महान फिल्म बनने से रोकती है।