रामनगरी में आस्था का महासागर: ऐतिहासिक राम नवमी का भव्य आयोजन

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Mediawali news

अयोध्या में राम नवमी 2026 का पर्व इस बार अभूतपूर्व भव्यता और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली राम नवमी है, जिसे लेकर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु रामनगरी पहुंचे हैं। पूरी अयोध्या ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज रही है। दोपहर 12 बजे शहर के करीब आठ हजार मंदिरों में एक साथ घंटा-घड़ियाल बजाकर भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया गया। यह दिव्य क्षण भक्तों के लिए बेहद भावुक और आध्यात्मिक अनुभव लेकर आया।

सरयू तट से मंदिरों तक उमड़ा जनसैलाब

राम नवमी के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में पवित्र स्नान करना शुरू कर दिया था। सरयू घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे नजर आए। स्नान के बाद भक्त कनक भवन, हनुमानगढ़ी और नागेश्वरनाथ मंदिर की ओर बढ़े, जहां भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशेष रूप से कनक भवन में सोहर और बधाई गीतों की गूंज ने माहौल को और भी दिव्य बना दिया। वहीं रामलला के मुख्य मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

सूर्य तिलक बना आकर्षण का केंद्र

इस बार राम नवमी का सबसे खास आकर्षण ‘सूर्य तिलक’ रहा। ठीक दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें विशेष दर्पण और लेंस तकनीक के माध्यम से रामलला के मस्तक पर पड़ीं। आस्था और विज्ञान के इस अद्भुत संगम ने पूरे आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। इस अवसर पर रामलला को पीले वस्त्र धारण कराए गए और उन्हें छप्पन भोग अर्पित किया गया। पूरा मंदिर परिसर देश-विदेश के फूलों से सजा, जिससे अयोध्या त्रेतायुग जैसी प्रतीत हुई।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अयोध्या को कई जोन और सेक्टर में विभाजित किया। सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा और ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, छाया और मैटिंग की व्यवस्था की गई। वीआईपी दर्शन पर रोक लगाकर आम श्रद्धालुओं को प्राथमिकता दी गई।

डिजिटल माध्यम से दुनिया भर में प्रसारण

जो श्रद्धालु मंदिर तक नहीं पहुंच सके, उनके लिए शहर में लगभग 100 बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगाई गईं। इसके अलावा पूरे आयोजन का सीधा प्रसारण भी किया गया, जिससे दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। संतों और धर्माचार्यों के अनुसार, यह राम नवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सदियों की आस्था और संघर्ष का प्रतीक है, जो मानवता के लिए नए युग का संदेश देती है।

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