वायरल वीडियो के बाद जागी पुलिस: कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड में हाईप्रोफाइल आरोपी पर कार्रवाई तेज
Kanpur News
कानपुर के वीआईपी रोड पर रविवार दोपहर हुई लेम्बोर्गिनी दुर्घटना का मामला अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद तूल पकड़ चुका है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और अब हाईप्रोफाइल आरोपी शिवम मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। शिवम मिश्रा तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे बताए जा रहे हैं।
घटना में छह लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हादसा उस वक्त हुआ जब दिल्ली नंबर की लेम्बोर्गिनी कार रिंग रोड चौराहे के पास अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी ऑटो और बुलेट से टकराते हुए फुटपाथ पर चढ़ गई। फुटपाथ पर खड़े चमनगंज निवासी मो. तौफीक अहमद के पैर में चोट आई, जबकि बुलेट सवार विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी भी घायल हो गए।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने कार को घेर लिया। बताया गया कि शिवम की कार के पीछे फॉर्च्यूनर में सुरक्षा गार्ड चल रहे थे। पुलिस पहुंचने से पहले गार्डों ने कार का शीशा तोड़कर शिवम को बाहर निकाला और निजी अस्पताल में भर्ती कराया। यही दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।
पहले इस मामले में अज्ञात चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और कार को थाने लाकर ढंक दिया गया था। लेकिन वीडियो वायरल होने और विपक्ष के हमलावर रुख के बाद पुलिस ने जांच तेज की। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें शिवम मिश्रा का नाम सामने आया। अब केस में उनका नाम जोड़ा जा रहा है।
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि जांच जारी है और आरोपी के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई होगी। लापरवाही के आरोप में ग्वालटोली थाना प्रभारी संतोष गौड़ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि सीसीटीवी के आधार पर पहचान की जा रही है और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बीजेपी सांसद रमेश अवस्थी ने भी बयान देते हुए कहा कि “सरकार किसी को नहीं बचा रही है। आरोपी का नाम सामने आ चुका है और उसे जेल भेजा जाएगा।” वहीं समाजवादी पार्टी ने इसे “बड़े बाप के बेटे” को बचाने की कोशिश बताया है।
परिजनों का दावा है कि शिवम को पिछले छह माह से दौरे आ रहे हैं और इंग्लैंड में इलाज चल रहा है। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट तलब की है। सोमवार को पुलिस आर्यनगर स्थित आवास पहुंची, लेकिन कोई नहीं मिला। परिवार के दिल्ली में होने की बात कही जा रही है।
देशभर में ऐसे हाईप्रोफाइल सड़क हादसों के मामलों में अक्सर शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं। क्या इस बार कानून सबके लिए बराबर साबित होगा, या मामला फिर रसूख की धूल में दब जाएगा? फिलहाल, सोशल मीडिया की नजर इस केस पर टिकी है।