ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप के नाम पर ठगी: MBA–BBA पास दो युवक गिरफ्तार
- टेलीग्राम और वॉट्सऐप पर ग्रुप बनाकर खेलते थे, गेम
फेज वन थाना और साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप पर रुपये लगवाकर डबल मुनाफा कमाने का झांसा देकर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए दो मास्टरमाइंडों को गिरफ्तार किया है। दोनों MBA और BBA पास आउट हैं। पुलिस के मुताबिक ये दोनों आरोपी सेक्टर-2 बी-ब्लॉक के एक बिल्डिंग के टॉप फ्लोर में फर्जी कॉल सेंटर चलाते थे। रेड के दौरान आरोपियों के पास से 7 लैपटॉप और 8 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की पूरी प्रक्रिया में किया जा रहा था। आरोपी कॉल सेंटर में महिलाओं को नौकरी पर रख हुए थे। जिनका काम लोगों से बातचीत कर गेम पर रुपये लगवाने का होता था। आरोपी अब तक 300 से अधिक लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। पुलिस पीड़ितों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है।
एडीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि सचिन गोस्वामी उम्र 33 हाल निवासी दिल्ली, मूल निवासी मुजफ्फरनगर एमबीए फाइनेंस और कुणाल गोस्वामी, उम्र 22 हाल निवासी दिल्ली, मूल निवासी गाजियाबाद शिक्षा BBA को गिरफ्तार किया गया है। भारत में ऑनलाइन बेटिंग और कई गेमिंग एप प्रतिबंधित हैं, लेकिन इसके बावजूद यह गिरोह इंटरनेट पर आकर्षक विज्ञापन डालकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। विज्ञापनों के जरिए वे जल्दी मुनाफाकलर प्रेडिक्शन, ब्लू-रेड गेम, डेली प्रॉफिट जैसे लालच दिखाकर लोगों को लिंक पर ले जाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता, उसका डेटा आरोपियों के पास पहुंच जाता। इसके बाद कॉल सेंटर से उसको फोन जाता और उसे बताया जाता कि गेमिंग, बेटिंग एप से बड़ी कमाई हो सकती है। फिर उन्हें फर्जी गेमिंग प्लेटफार्म का लिंक भेजा जाता, जहां आईडी और पासवर्ड बनाने के नाम पर पहले छोटी रकम ली जाती। विश्वास जीतने के लिए आरोपी शुरुआत में पीड़ित को 200, 500 या 1000 रुपये जीताकर भेजते भी थे। इससे लोगों को लगता था कि खेल असली है और उनमें बड़ा पैसा कमाने का मौका है। जैसे ही व्यक्ति भरोसे में आ जाता, उससे बड़ी रकम जमा कराई जाती। रकम जमा होने के बाद गेम में लगातार हार दिखा दी जाती या खाते को फ्रीज बता दिया जाता और आखिर में पीड़ित का नंबर ब्लॉक कर आरोपी संपर्क तोड़ लेते थे। पुलिस को कई मामलों में एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत मिली तो टीम बनाकर कार्रवाई की है।
मनी म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कराते थे रुपये
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग ठगी की रकम सीधे अपने खातों में नहीं लेते थे। इसके लिए वे मनी म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल करते थे, ताकि पुलिस को ट्रांजैक्शन का पीछा करने में मुश्किल हो। इसके अलावा फर्जी आईडी पर लिए गए सिम कार्ड के जरिए कॉलिंग की जाती थी। कॉल सेंटर, एप या किसी तरह के लाइसेंस किसी भी चीज़ का इनके पास कोई कागज नहीं मिला है। आरोपी एक सिम से तीन से चार लोगों से बातचीत करने के बाद उसे तोड़कर फेंक देते थे। इसके बाद फर्जी नाम से सिम खरीदकर दोबारा से लोगों को झांसे में लेना शुरू कर देते थे। पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
वाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप बनाकर चलाते हैं, गिरोह
यह गिरोह ऑनलाइन गेमिंग और बैंटिंग ऐप का फर्जी लिंक तैयार कर उसे वॉट्सऐप ग्रुप पर शेयर करते हैं। इसके लिए ये लोग कई टेलीग्राम और वॉट्सऐप पर ग्रुप बना रखे हैं। साथ ही यह सोशल मीडिया पर अकाउंट भी चलाते हैं। जिसके माध्यम से लोग ठगों से जुड़ते हैं। आरोपी दूर दराजे के युवाओं के अधिक जाल में फंसातें हैं। जिससे उनके कॉल सेंटर तक वे लोग पहुंच न सके। वहीं कोई फर्जी बताता था तो आरोपी कॉल सेंटर ऑफिस पर बुलाकर उन्हें भरोसा दिलाते थे। पुलिस अन्य पीड़ितों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने दी चेतावनी
पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि कलर प्रेडिक्शन, पैसे डबल, रेड-ग्रीन बेटिंग जैसे सभी ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग एप पूरी तरह फर्जी होते हैं। इनमें पैसा लगाना कानूनन अपराध भी है और अत्यधिक जोखिम भरा भी। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे लिंक टेलीग्राम व्हाट्सएप ग्रुप या वेबसाइट पर भरोसा न करें जो जल्दी मुनाफे का लालच देते हों। अपनी आधार आईडी, पैन कार्ड या बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को बिल्कुल न दें।