फर्जी कोर्ट में पेशी दिखाकर रिटायर्ड अधिकारी को 6 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट’, 12 लाख की साइबर ठगी

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क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर आया कॉल

साइबर अपराधियों ने ठगी का नया और खतरनाक तरीका अपनाते हुए दिल्ली के एक रिटायर्ड सरकारी अधिकारी को 6 दिनों तक मानसिक रूप से “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 12 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित को 29 नवंबर को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को प्रदीप सावंत, इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर, क्राइम ब्रांच हेडक्वार्टर दिल्ली बताया और मनी लॉन्ड्रिंग केस का हवाला देकर डराया।

आधार कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाया

ठग ने पीड़ित से कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर केनरा बैंक, दिल्ली में खाता खोला गया है, जिसमें नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा पैसा ट्रांसफर हुआ है। यह कहकर कॉल काट दी गई। कुछ देर बाद व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल आई, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नजर आया।

‘डिजिटल अरेस्ट’ और फर्जी दस्तावेज

वीडियो कॉल पर पीड़ित को बताया गया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में केस दर्ज है और जांच में सहयोग जरूरी है। इसके बाद उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया और एक पत्र लिखवाया गया, जिसमें डेबिट कार्ड खोने और मनी लॉन्ड्रिंग से कोई संबंध न होने की बात लिखवाई गई।

ऑनलाइन फर्जी कोर्ट में पेशी

1 दिसंबर को ठगों ने पीड़ित को ऑनलाइन फर्जी कोर्ट में पेश किया। वीडियो में जज के वेश में एक व्यक्ति बैठा था और एक वकील बहस करता दिख रहा था। फर्जी जज ने पीड़ित पर आरोप लगाते हुए बैंक खातों, एफडी और म्यूचुअल फंड की “वेरिफिकेशन” के नाम पर रकम ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

दो बार में 12 लाख रुपये ट्रांसफर

डर के माहौल में पीड़ित ने पहले 2 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर ठगों के खातों में ट्रांसफर किए। इसके बाद 4 दिसंबर को दोबारा कॉल कर 10 लाख रुपये और ट्रांसफर करवा लिए गए।

तीसरी मांग पर खुली ठगी की पोल

6 दिसंबर को जब ठगों ने फिर कॉल कर म्यूचुअल फंड अकाउंट बंद कराने और और रुपये मांगने शुरू किए, तब पीड़ित को शक हुआ। उन्होंने तुरंत NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच शुरू

पीड़ित रामसेवक तोमर सेक्टर-78 स्थित द हाइड पार्क सोसायटी के निवासी हैं और दिल्ली के एक सरकारी विभाग से रिटायर्ड हैं। साइबर थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की “डिजिटल अरेस्ट”, फर्जी कोर्ट या जांच के नाम पर मांगी गई रकम पर भरोसा न करें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

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