फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: डेटा शीट से 303 पीड़ितों का खुलासा, दो आरोपी फरार
Noida news
साइबर थाना और सेक्टर 126 थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जिस फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उनके पास से बरामद डेटा शीट से 303 लोगों का ब्योरा मिला है। वहीं आरोपी एक साल पहले सेक्टर 62 में इसी तरह का कॉल सेंटर खोलकर लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं। ये लोग सेक्टर-132 स्थित एटीएस बुलेवार्ड के टावर-ए में एक साल के एग्रीमेंट पर ऑफिस किराए पर लिए थे, जिसकी अंतिम तारीख 12 फरवरी थी। वे लोग जाने की प्लानिंग में थे, तभी पुलिस ने छापा मारकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल दो आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगी हुई है। मामले में साइबर थाना पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान प्रतिबिंब पोर्टल और एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों में जिन मोबाइल नंबरों का जिक्र था, उनकी लोकेशन नोएडा में मिली। पुलिस टीम ने बुधवार को सेक्टर 132 स्थित ऑफिस पर दबिश दी तो अंदर तीन युवक कॉल करते मिले। पुलिस ने पहले राहुल पुत्र निवासी जालौन को पकड़ा। इसके बाद पुलिस ने राहुल (25), प्रशांत (25) और विशाल (20) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि देश और विदेश के क्रूज-शिप पर नौकरी दिलवाने के बहाने ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर को फैज वारिस, उसका भाई सैफ वारिस और सचिन उर्फ शाहिल खान नाम के तीन युवक संचालित करते हैं। ये तीनों आरोपी कानपुर निवासी हैं। तीनों सरगना पार्टी करने के लिए ग्रेटर नोएडा गए हुए थे। पुलिस प्रशांत को अपने साथ लेकर गई और ग्रेटर नोएडा सेक्टर 151 स्थित फ्लैट पर पार्टी के इंतजार में सैफ वारिस अपने भाई फैज और सचिन के इंतजार में बैठा था। पुलिस ने सैफ वारिस निवासी कानपुर को गिरफ्तार कर लिया। प्रशांत और सैफ के मोबाइल की चैट में बहुत सारी ठगी के ट्रांजेक्शन के बारे में जानकारी मिली है। साथ ही वॉट्सऐप चैट पर पीड़ितों से बातचीत का डेटा मिला है।
असली शिपिंग कंपनी से कोई संबंध नहीं मिला
बरामद डेटा शीट से 303 पीड़ितों के मोबाइल नंबर मिले हैं। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, शहर और जमा कराई गई रकम का ब्योरा दर्ज था। आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सीहायर मरीन सर्विस नाम से पेज बनाकर लोगों को क्रूज शिप, कार्गो शिप और अन्य मरीन जॉब का झांसा देते थे। अच्छी सैलरी और विदेश प्लेसमेंट का लालच देकर कमीशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे अलग-अलग बैंक खातों में डलवाए जाते थे। जांच में सामने आया कि कंपनी का किसी असली शिपिंग कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
बीसीए थर्ड ईयर का छात्र है मुख्य सरगना
पुलिस ने बताया कि कंपनी का प्रोपराइटर राहुल को बनाया गया था। वहीं प्रशांत बीए पास आउट है और विशाल शर्मा बीए का छात्र है। वहीं मुख्य सरगना सैफ वारिस बीसीए थर्ड ईयर का छात्र है। नोएडा में पढ़ाई के दौरान उसने फर्जी कॉल सेंटर खोलने की योजना बनाई। जिस नाम से कंपनी खोली गई थी, वह रजिस्टर्ड भी नहीं है। पुलिस के मुताबिक ये लोग अब तक 400 से अधिक लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं।