चचेरे भाई की हत्या में एक दोषी, दूसरा बरी

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Mediawali news, Delhi

साकेत कोर्ट ने साल 2019 में हुए चचेरे भाई की हत्या के मामले में एक आरोपी को दोषी ठहराया है, जबकि दूसरे आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि दूसरे आरोपी की भूमिका साझा मंशा के तहत साबित नहीं हो सकी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गीतांजलि ने सानाउल्लाह और बापी दास के खिलाफ दर्ज मामले में यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा कि अजरुद्दीन को आखिरी बार आरोपियों के साथ देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज में वह जसौला मॉल के पास सानाउल्लाह और बापी दास के साथ नजर आया। इससे आरोपियों पर संदेह और मजबूत हुआ। अदालत ने कहा कि जब यह साबित हो गया कि मृतक आखिरी बार आरोपियों के साथ था, तो उन्हें आगे की घटनाओं की जानकारी देनी चाहिए थी, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके।

बापी दास को संदेह का लाभ

अदालत ने कहा कि बापी दास के खिलाफ यह साबित नहीं हो सका कि उसने सानाउल्लाह के साथ मिलकर हत्या की। इसलिए उसे बरी कर दिया गया। अदालत ने सानाउल्लाह को हत्या और अवैध हथियार के इस्तेमाल का दोषी ठहराया है। सजा पर सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

प्रेम संबंध बना विवाद की वजह

अभियोजन के अनुसार, अजरुद्दीन कढ़ाई का काम करने दिल्ली आया था। वह अपने चचेरे भाई सानाउल्लाह के घर आता-जाता था। इसी दौरान उसे सानाउल्लाह की बहन हनीफा से प्रेम हो गया। परिवार ने इसका विरोध किया और अजरुद्दीन को धमकी दी, जिसके बाद वह हैदराबाद चला गया। घटना से करीब एक महीने पहले वह वापस दिल्ली लौटा और काम शुरू किया। 4 अगस्त 2019 को सानाउल्लाह ने उसे मिलने के लिए बुलाया। अजरुद्दीन अपने साथी असलम के साथ गया, लेकिन असलम को रास्ते में ही रुकने के लिए कह दिया गया। बाद में अजरुद्दीन का फोन बंद हो गया। 5 अगस्त को उसके भाई अब्बास गोल्डर ने शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अजरुद्दीन का शव मदनपुर खादर की नहर कॉलोनी से बरामद हुआ। शव पर कई चाकू के वार थे और गला कटा हुआ था।

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