सोने की चमक से बढ़ी भारतीय परिवारों की दौलत: 2025 में ₹117 लाख करोड़ का वेल्थ बूम, क्यों बना Gold सबसे बड़ा गेमचेंजर?
कैलेंडर वर्ष 2025 भारतीय परिवारों के लिए संपत्ति के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुआ। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की Yearbook 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति में करीब ₹117 लाख करोड़ (लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर) की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वेल्थ बूम के पीछे सबसे बड़ा कारण रहा — सोने की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ तेजी।
25 साल में पहली बार सोने ने रचा इतिहास
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में सोने की कीमतों में ₹58,310 प्रति 10 ग्राम या 73.45% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। यह पिछले 25 वर्षों में सोने से हुआ सबसे बड़ा संपत्ति लाभ है। इस तेज उछाल ने भारतीय परिवारों के नेटवर्थ को मजबूत किया और खर्च करने की क्षमता (consumption power) को सहारा दिया।
सोने की बढ़ती कीमतों का असर गोल्ड लोन पर भी दिखा, जहां खुदरा उधारी में उल्लेखनीय इजाफा हुआ।
जब शेयर बाजार कमजोर पड़ा, तब सोना बना सहारा
2025 भारतीय शेयर बाजारों के लिए आसान नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह साल बाजार के लिए consolidation phase जैसा रहा। निफ्टी ने वैश्विक बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में लगभग 25% कम प्रदर्शन किया, जो करीब तीन दशकों में सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है।
ऐसे माहौल में सोना स्पष्ट रूप से Safe Haven Asset बनकर उभरा। जब इक्विटी में दबाव दिखा, तब निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया, जिससे इसकी कीमतों को और मजबूती मिली।
वैश्विक बाजारों में कौन चमका, कौन फिसला
2025 में वैश्विक स्तर पर सोना, यूरोपियन मार्केट, उभरते बाजार और ‘Magnificent Seven’ टेक शेयर टॉप परफॉर्मर रहे। इनमें Apple, Microsoft, Amazon, Alphabet, Meta, Nvidia और Tesla शामिल हैं, जो AI, क्लाउड, EV और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में इनोवेशन के लिए जानी जाती हैं।
वहीं दूसरी ओर कच्चा तेल, अमेरिकी डॉलर और बिटकॉइन साल के सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले एसेट्स में शामिल रहे।
Small–Mid Cap से पिछड़े Large Cap शेयर
एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट बताती है कि कई सालों की तेज बढ़त के बाद 2025 में स्मॉल और मिड-कैप शेयरों का प्रदर्शन लार्ज-कैप के मुकाबले कमजोर रहा। वैल्यूएशन में ठंडक आने से लार्ज-कैप शेयर अपेक्षाकृत बेहतर वैल्यू ऑफर कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
फंड हाउस का मानना है कि मौजूदा अनिश्चित बाजार माहौल में निवेशकों को हाइब्रिड फंड्स पर विचार करना चाहिए। ऐसे फंड इक्विटी, डेट और गोल्ड का संतुलित मिश्रण पेश करते हैं, जिससे पोर्टफोलियो की अस्थिरता कम होती है और जोखिम बेहतर तरीके से मैनेज होता है।