शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में गिरावट, आईटी कंपनियों के शेयर दबाव में
आईटी शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव, निवेशकों ने अपनाया सतर्क रुख
मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के शेयरों से देखने को मिला, जहां प्रमुख कंपनियों में बिकवाली हावी रही।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी फिसले
सोमवार सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स शुरुआती घंटों में कई अंकों की गिरावट के साथ नीचे आ गया। वहीं निफ्टी भी कमजोर शुरुआत करते हुए अपने अहम स्तरों से फिसलता दिखा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने घरेलू बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
आईटी शेयरों में क्यों आई गिरावट
आईटी सेक्टर के शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख विदेशी बाजारों में मांग को लेकर बनी अनिश्चितता मानी जा रही है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव का असर भी आईटी कंपनियों पर पड़ा है। चूंकि इस सेक्टर की बड़ी कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है, इसलिए मुद्रा में बदलाव सीधे तौर पर इनके मुनाफे को प्रभावित करता है।
प्रमुख आईटी कंपनियों जैसे टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयर शुरुआती कारोबार में नुकसान के साथ ट्रेड करते दिखाई दिए। आईटी शेयरों में आई इस कमजोरी ने पूरे बाजार की चाल को प्रभावित किया।
बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों ने दी सीमित राहत
हालांकि, बाजार में पूरी तरह से बिकवाली का माहौल नहीं रहा। बैंकिंग और एफएमसीजी सेक्टर के कुछ चुनिंदा शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को बड़ी गिरावट से कुछ हद तक सहारा मिला। इन सेक्टरों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए अनिश्चितता के दौर में निवेशक इनकी ओर रुख करते हैं।
निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी रहेगी। खासकर अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर होने वाले फैसले बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
तिमाही नतीजों का इंतजार
घरेलू स्तर पर निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब तक कॉरपोरेट नतीजों और वैश्विक संकेतों को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह
फिलहाल बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। अल्पकालिक निवेश में जोखिम बना रह सकता है, जबकि लंबी अवधि के निवेशकों को सोच-समझकर और चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।