नोएडा हेट क्राइम केस: सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने मानी कमी, कहा- IPC 153B लगनी चाहिए थी
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Noida Hate Crime Case Update: साल 2021 के नोएडा हेट क्राइम मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम बयान दिया है। सरकार ने माना कि इस केस में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153B लगाई जानी चाहिए थी, लेकिन एफआईआर में इसे शामिल नहीं किया गया। यह मामला जुलाई 2021 में एक वरिष्ठ नागरिक के साथ कथित दुर्व्यवहार और धार्मिक टिप्पणी से जुड़ा है। इसमें राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोपों और दावों के लिए सजा का प्रावधान है। यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ से कहा कि मामले में आईपीसी की धारा-153बी के तहत प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए थी। हालांकि, इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा गया?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि मामले में IPC की धारा 153B के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए थी। यह सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के सामने हुई। सरकार ने यह भी बताया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
IPC 153B क्यों है अहम?
धारा 153B राष्ट्रीय एकता के खिलाफ बयान, आरोप या दावे करने से जुड़ी है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि घटना के दौरान उनकी धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, लेकिन एफआईआर में धारा 153B और 295A नहीं जोड़ी गई। सुप्रीम कोर्ट ने पहले यूपी सरकार से पूछा था कि प्रासंगिक धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।
अब आगे क्या होगा?
सरकार की ओर से कोर्ट को दो विकल्प सुझाए गए:
- राज्य सरकार संबंधित अदालत में आगे की जांच के लिए आवेदन दे सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कार्रवाई के निर्देश जारी कर सकता है।
पीठ ने कहा कि राज्य सरकार खुद कार्रवाई करे तो बेहतर होगा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि एक हफ्ते के भीतर आगे की जांच के लिए आवेदन दायर किया जाएगा।
मुआवजे पर क्या बोला कोर्ट?
याचिकाकर्ता के वकील ने पीड़ित को मुआवजा देने की मांग उठाई।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुआवजे के लिए उचित मंच पर जाना होगा।
क्या है पूरा मामला?
- 4 जुलाई 2021 को नोएडा में कथित हेट क्राइम की घटना
- वरिष्ठ नागरिक के साथ मारपीट और अपमान का आरोप
- धार्मिक पहचान पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी
- एफआईआर में धारा 153B और 295A शामिल नहीं
अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की निष्पक्ष जांच और सुनवाई की मांग पर सुनवाई जारी है।