मैन्युफैक्चरिंग–सर्विसेज की रफ्तार से अर्थव्यवस्था मजबूत, 6 तिमाहियों में सबसे तेज 8.2% GDP ग्रोथ
जुलाई–सितंबर तिमाही में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई–सितंबर 2025 तिमाही में भारत की GDP 8.2 प्रतिशत बढ़ी है। यह बीते छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। इससे पहले 2023-24 की चौथी तिमाही में ग्रोथ 8.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। यह वृद्धि तमाम अनुमानों से कहीं बेहतर रही।
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज बने ग्रोथ इंजन
इस तेज आर्थिक बढ़त का मुख्य आधार मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर रहे। मैन्युफैक्चरिंग GVA में 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह सिर्फ 2.2 प्रतिशत थी। वहीं ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जैसी सेवाओं में 7.4 प्रतिशत और फाइनेंशियल सर्विसेज में 10.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखी गई।
निजी खपत और निवेश का अहम योगदान
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार, निजी खपत में तेजी GDP ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह रही। निजी खर्च (PFCE) 7.9 प्रतिशत बढ़ा और GDP में इसकी हिस्सेदारी 62.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके साथ ही पूंजी निवेश (GFCF) में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि ने भी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
महंगाई में नरमी से बढ़ा डिस्क्रेशनरी खर्च
दूसरी तिमाही में खुदरा और थोक महंगाई में गिरावट देखने को मिली। खासकर खाद्य महंगाई कम रहने से उपभोक्ताओं का विवेकाधीन खर्च बढ़ा। GST दरों में तर्कसंगत बदलाव, इनकम टैक्स और ब्याज दरों में कटौती का असर भी खपत पर दिखा।
कृषि और निर्माण में धीमापन
जहां एक ओर इंडस्ट्री और सेवाओं ने मजबूती दिखाई, वहीं कृषि और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ कुछ कमजोर रही। कृषि वृद्धि 3.5 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन 7.2 प्रतिशत पर आ गई।
GDP का बढ़ता आकार
सितंबर तिमाही में GDP का आकार 48.63 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 44.94 लाख करोड़ रुपये था। नॉमिनल GDP भी बढ़कर 85.25 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।
अगली तिमाही से नई सीरीज
मंत्रालय ने बताया कि दिसंबर तिमाही से GDP के आंकड़े नई बेस ईयर (2022-23) के आधार पर जारी होंगे, जिससे आर्थिक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।