डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो पर, 90.47 के स्तर तक फिसला
भारत की मुद्रा रुपया मंगलवार, 11 दिसंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.47 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले 4 दिसंबर को यह 90.43 के रिकॉर्ड लो पर था।
2025 की शुरुआत से अब तक रुपया 5% से अधिक कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 85.70 थी।
विदेशी फंड्स की निकासी से बढ़ा दबाव
जुलाई 2025 से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजारों से ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली की है।
इस बड़े पैमाने पर निकासी से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपये पर लगातार दबाव बना।
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से गिरी भारतीय करेंसी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लागू किया है।
इसका सीधा असर:
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GDP ग्रोथ में 60–80 बेसिस पॉइंट की गिरावट की आशंका
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फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है
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भारतीय निर्यात महंगा होने से कॉम्पिटिटिवनेस कम
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विदेशी मुद्रा की आमद घटी → रुपया कमजोर हुआ
आयातकों की डॉलर खरीद से बढ़ा प्रेशर
तेल, सोना और बड़े आयातक क्षेत्र हेजिंग के लिए भारी मात्रा में डॉलर खरीद रहे हैं।
इसके कारण:
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डॉलर की मांग और बढ़ी
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रुपया और तेजी से नीचे आया
RBI का सीमित हस्तक्षेप, गिरावट तेज हुई
LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार—
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इंडिया–US ट्रेड डील में लगातार देरी से बाजार में अनिश्चितता
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RBI इस बार करेंसी बाजार में कम हस्तक्षेप कर रहा है
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मेटल और सोने की रिकॉर्ड कीमतों ने आयात बिल बढ़ाया
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रुपया तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड हो चुका है
बाजार को अब शुक्रवार को आने वाली RBI पॉलिसी से स्थिरता की उम्मीद है।
आम लोगों पर सीधा असर: इम्पोर्ट, यात्रा और पढ़ाई महंगी
इम्पोर्टेड सामान महंगा
इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम और सोना जैसी चीजों की कीमतें बढ़ेंगी।
विदेश यात्रा होगी महंगी
टिकट, होटल से लेकर दैनिक खर्च तक — सब महंगा पड़ने वाला है।
विदेशी छात्रों पर बढ़ेगा बोझ
पहले 1 डॉलर = ₹50 (उदाहरण के तौर पर)
अब 1 डॉलर = ₹90.47
फीस, रहन-सहन और खाने-पीने का खर्च काफी बढ़ेगा।
करेंसी की वैल्यू कैसे तय होती है?
रुपये की मजबूती या कमजोरी इन कारकों पर निर्भर करती है:
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डॉलर की मांग और आपूर्ति
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विदेशी निवेश का प्रवाह
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फॉरेन रिजर्व का स्तर
फॉरेन रिजर्व घटे → रुपया कमजोर
फॉरेन रिजर्व बढ़े → रुपया मजबूत