भारत की GDP FY26 में 7.4% बढ़ेगी
नई दिल्ली: सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह अनुमान First Advance Estimate के तहत जारी किया गया है, जिसे आगे वास्तविक आर्थिक आंकड़ों के आधार पर संशोधित किया जा सकता है। सरकार और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह दर भारत की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत अर्थव्यवस्था
वित्त मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक आर्थिक दबाव, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई जैसे कारकों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है। FY26 के लिए अनुमानित 7.4% की वृद्धि दर यह संकेत देती है कि भारत विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
सेवा, निर्माण और विनिर्माण बने ग्रोथ के इंजन
GDP वृद्धि का प्रमुख आधार सेवा क्षेत्र, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। सेवा क्षेत्र में वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र को घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च और उत्पादन गतिविधियों से समर्थन मिल रहा है।
कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक संकेत
कृषि क्षेत्र में भी वृद्धि के सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं, हालांकि इसकी रफ्तार अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ी धीमी रह सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर मानसून और सरकारी योजनाओं का असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।
घरेलू निवेश और खपत से मिलेगी मजबूती
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि घरेलू निवेश, उपभोग में वृद्धि और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च GDP ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। निजी क्षेत्र का निवेश धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है, जिससे रोजगार और औद्योगिक उत्पादन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
बजट और नीतिगत फैसलों के लिए संकेत
यह अनुमान आगामी केंद्रीय बजट और नीतिगत निर्णयों के लिए अहम मार्गदर्शन प्रदान करेगा। सरकार का मानना है कि मजबूत आर्थिक गतिविधियां और सकारात्मक निवेश माहौल आने वाले वित्त वर्ष में भी विकास को गति देते रहेंगे।
मजबूत संकेत देती भारतीय अर्थव्यवस्था
कुल मिलाकर, FY26 के लिए 7.4% GDP वृद्धि का अनुमान यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर, मजबूत और भविष्य को लेकर आशावादी है। यह अनुमान व्यापार, रोजगार और निवेश के लिए सकारात्मक संकेत देता है।