भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस का तंज, सरकार ने कहा- देशहित सर्वोपरि, किसी दबाव में नहीं हुआ समझौता
रूसी तेल और व्यापार समझौते पर उठे सवाल, लेकिन सरकार का दावा- भारत की रणनीति साफ और मजबूत
भारत और अमेरिका के बीच हुए पहले चरण के द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रूसी तेल की खरीद और व्यापार समझौते पर मंत्रियों के बयानों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि सरकार की ओर से साफ संकेत हैं कि भारत ने यह समझौता पूरी तरह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया है, न कि किसी विदेशी दबाव में।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “समग्र सरकार” (Whole of Government) के दृष्टिकोण की बात करते हैं, लेकिन रूसी तेल और भारत–अमेरिका ट्रेड डील पर मंत्रियों के बयान आपस में मेल नहीं खाते। उनका आरोप है कि वाणिज्य मंत्री विदेश मंत्री की ओर इशारा करते हैं और विदेश मंत्री वाणिज्य मंत्री की ओर।
सरकार का पक्ष: रणनीति स्पष्ट, उद्देश्य देशहित
सरकार का कहना है कि भारत की विदेश और व्यापार नीति एक दीर्घकालिक रणनीति पर आधारित है। रूस से तेल खरीदना भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मामला है, जबकि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता आर्थिक विकास और निर्यात बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
बीते शनिवार को भारत और अमेरिका ने पहले चरण के व्यापार समझौते का ढांचा जारी किया था। इसके तहत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, विमान के पुर्जे, तकनीकी सामान, कीमती धातुएं और कोयला खरीदने की मंशा जताई है। इसके बदले अमेरिका भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
रूसी तेल पर भारत का रुख साफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को हटाने का आदेश भी जारी किया है। इससे साफ होता है कि भारत ने अपने हितों से समझौता किए बिना अंतरराष्ट्रीय संतुलन बनाए रखा है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि व्यापार समझौते में किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी समझौते से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि भारतीय बाजार और रोजगार पर नकारात्मक असर न पड़े।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
सरकार समर्थकों का मानना है कि आज भारत ऐसी स्थिति में है जहां वह बड़े देशों के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत कर रहा है। चाहे ऊर्जा नीति हो या व्यापार समझौता, भारत अब अपने फैसले खुद ले रहा है।
सरकार का साफ संदेश है-
भारत सहयोग करेगा, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।