आर्थिक समीक्षा का संकेत: सोना-चांदी की कीमतों में और उछाल संभव
महंगाई पर राहत, कीमती धातुओं पर दबाव
संसद में पेश आर्थिक समीक्षा के अनुसार अगले वित्त वर्ष में महंगाई बड़ा चिंता का विषय नहीं रहेगी, लेकिन सोना और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी मांग और कीमत दोनों बढ़ने की संभावना है।
वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा रही सुरक्षित निवेश की मांग
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि जब तक वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव और भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह कम नहीं होते, तब तक सोने और चांदी में निवेश बढ़ता रहेगा। निवेशक अस्थिर बाजार हालात में इन्हें सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जिससे इनके दाम नए रिकॉर्ड छू सकते हैं।
महंगाई का परिदृश्य रहेगा नियंत्रित
रिपोर्ट के मुताबिक मजबूत कृषि उत्पादन, स्थिर वैश्विक जिंस कीमतें और नीतिगत सतर्कता के कारण महंगाई लक्षित दायरे में रहने का अनुमान है। जीएसटी दरों के युक्तिकरण और आपूर्ति पक्ष की बेहतर स्थिति से भी मुद्रास्फीति पर दबाव कम रहेगा।
कुछ जोखिम अब भी मौजूद
आर्थिक समीक्षा ने यह भी आगाह किया है कि विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, मूल धातुओं की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता जैसे जोखिम बने हुए हैं। इन कारकों पर लगातार निगरानी और समयानुसार नीतिगत कदम जरूरी होंगे।
आरबीआई और आईएमएफ का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी अगले वित्त वर्षों में महंगाई दर को लक्ष्य सीमा के भीतर रहने का अनुमान जताया है। आईएमएफ ने 2025-26 में 2.8% और 2026-27 में करीब 4% मुद्रास्फीति रहने का अनुमान दिया है, जबकि आरबीआई ने 2026-27 की शुरुआती दो तिमाहियों में लगभग 4% के आसपास महंगाई रहने की संभावना जताई है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में संभावित तेजी को देखते हुए सोना-चांदी खरीदने वालों को बाजार की चाल समझकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।