नोएडा में एटीएस का इंतजार, नए साल से सवा लाख कमर्शियल वाहन दूसरे जिलों पर निर्भर
ग्रेटर नोएडा। जिले में सालों से तैयार किए जा रहे ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) अब तक चालू नहीं हो सके हैं, जबकि शासन ने 1 जनवरी 2026 से स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं कि कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच केवल एटीएस के माध्यम से ही होगी। मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो जाएगी। ऐसे में सवा लाख से अधिक वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि नोएडा के दोनों प्रस्तावित एटीएस सेंटर अभी तक शुरू नहीं हुए हैं।
दूसरे जिलों पर निर्भर होंगे वाहन चालक
परिवहन विभाग के अनुसार 1 जनवरी से जिले के ई-रिक्शा, ऑटो, टैक्सी, बस और भारी मालवाहक ट्रक मालिकों को गाजियाबाद और दिल्ली के एटीएस सेंटरों का रुख करना पड़ेगा। स्थानीय अधिकारी भी नहीं बता पा रहे कि नोएडा के सेंटर कब चालू होंगे। फिलहाल मैनुअल तरीके से रोजाना औसतन 50 वाहन की फिटनेस जांच की जा रही है।
एआरटीओ नंद कुमार का कहना है कि “मैनुअल सिस्टम 31 दिसंबर तक जारी रहेगा, लेकिन 1 जनवरी से पूरी तरह बंद हो जाएगा। शासन की मंशा प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।”
वाहन चालकों की मुश्किलें
वाहन स्वामी इस फैसले से परेशान हैं। उन्हें दूसरे जिलों में जाकर फिटनेस करानी होगी, जिससे लंबी दूरी तय करना, ईंधन खर्च और समय की बर्बादी होगी। स्लॉट न मिलने की समस्या भी सामने आ सकती है। छोटे वाहन चालक और ई-रिक्शा चालक इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
जिले में एटीएस की स्थिति
ग्रेटर नोएडा में दो एटीएस सेंटर तैयार हैं, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कमियों के कारण अब तक शुरू नहीं हो पाए। अधिकारियों का कहना है कि इन सेंटरों के संचालन से जुड़े निर्णय सीधे शासन स्तर पर हो रहे हैं।
फिटनेस नियम और प्रक्रिया
जिले में 1.15 लाख से अधिक कमर्शियल वाहन रजिस्टर हैं।
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सामान्य कमर्शियल वाहन: पहले 8 साल में हर दो साल में एक बार, उसके बाद हर साल फिटनेस अनिवार्य।
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ई-रिक्शा: पहले दो साल बाद पहली फिटनेस, तीसरे साल से हर साल फिटनेस अनिवार्य।
प्रदेश में फिलहाल 13 जनपदों में 15 एटीएस सेंटर संचालित हैं। इन सेंटरों में रोलर ब्रेक टेस्टर, सस्पेंशन टेस्टर, साइड-स्लिप टेस्टर, जॉइंट-प्ले टेस्टर और स्पीडोमीटर जैसी आधुनिक मशीनों से जांच होगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और रिपोर्ट सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड की जाएगी।