AI Impact Summit 2026 में बड़ा ऐलान: 200 अरब डॉलर निवेश, बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्ती के संकेत
Mediawli news, नई दिल्ली।
भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अपना अगला रोडमैप स्पष्ट कर दिया है। अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में बच्चों के लिए सोशल मीडिया कंटेंट पर कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। साथ ही डीपफेक और एज-बेस्ड कंटेंट पर भी सख्त रेगुलेशन की तैयारी है। सरकार ने अगले दो वर्षों में आईटी और एआई सेक्टर में 200 अरब डॉलर (करीब 18 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की उम्मीद जताई है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर फोकस
समिट में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि कई देशों ने उम्र के आधार पर कंटेंट नियंत्रण को जरूरी माना है और भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने Digital Personal Data Protection Act 2023 (DPDP एक्ट) का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें बच्चों के डेटा और कंटेंट एक्सेस को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। सरकार उद्योग जगत और संसदीय समितियों के सुझावों के आधार पर आगे और सख्त नियम ला सकती है। मंत्री ने साफ कहा कि चाहे Meta Platforms हो, X Corp हो या Netflix Inc.—सभी को भारत के संविधान और कानूनी ढांचे के भीतर ही काम करना होगा।
डीपफेक और निगेटिव एआई पर टेक्नो-लीगल रणनीति
वैष्णव ने डीपफेक और एआई के दुरुपयोग को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि “निगेटिव एआई” से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी और कानून दोनों का संतुलित उपयोग जरूरी है। सरकार एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट और वैश्विक साझेदारियों के जरिए समाधान विकसित करने पर काम कर रही है। उन्होंने एआई को “पांचवीं औद्योगिक क्रांति” करार देते हुए कहा कि इससे हेल्थकेयर, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में लागत कम होगी और सेवाएं ज्यादा सुलभ बनेंगी।
200 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
सरकार का अनुमान है कि अगले दो वर्षों में एआई और आईटी स्टैक के विभिन्न स्तरों—इन्फ्रा, डीपटेक, एप्लिकेशन और एनर्जी लेयर—में 200 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आएगा। मंत्री के मुताबिक, 100 से ज्यादा कॉलेजों में इंडस्ट्री के सहयोग से रीस्किलिंग और अपस्किलिंग कार्यक्रम चल रहे हैं ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप टैलेंट तैयार किया जा सके।
AI का UPI मॉडल तैयार होगा
सरकार अब एआई को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए “AI का UPI” जैसा प्लेटफॉर्म मॉडल विकसित करने की दिशा में सोच रही है। मंत्री ने कहा कि जैसे डिजिटल पेमेंट में भारत ने वैश्विक मिसाल पेश की, वैसे ही एआई के क्षेत्र में भी एक सार्वभौमिक, भरोसेमंद और मल्टी-लैंग्वेज मॉडल तैयार किया जाएगा। इसका फायदा डॉक्टरों, शिक्षकों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा। सरकार क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों पर आधारित एआई मॉडल विकसित करने पर जोर दे रही है।
क्लीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर
मंत्री ने बताया कि भारत उन चुनिंदा देशों में है जहां 50 प्रतिशत से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता क्लीन एनर्जी स्रोतों से आती है। एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े निवेश की संभावनाएं हैं।
कुल मिलाकर, सरकार का संदेश स्पष्ट है- भारत एआई को केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डीपफेक पर प्रस्तावित सख्ती कब और किस रूप में सामने आती है।