ईरान का दावा: अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमला, अमेरिका ने बताया ‘फर्जी’

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Mediawali news

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी युद्धपोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। हालांकि United States ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ईरानी मिसाइलें युद्धपोत के करीब भी नहीं पहुंच पाईं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।

ईरान का क्या है दावा

ईरान के सैन्य संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) ने बयान जारी कर कहा कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले ने अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाया।

ईरान के अनुसार:
  • हमला ओमान के समुद्री क्षेत्र में किया गया।

  • यह स्थान ईरान की समुद्री सीमा से लगभग 340 किलोमीटर दूर बताया गया।

  • मिसाइल हमले के बाद युद्धपोत को नुकसान हुआ और उसे क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा।

हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत या तस्वीरें साझा नहीं की हैं।

अमेरिका ने दावे को बताया गलत

अमेरिका ने ईरान के दावे को तुरंत खारिज कर दिया।

United States Central Command (यूएस सेंट्रल कमांड) ने युद्धपोत की ताजा तस्वीर जारी करते हुए कहा कि कैरियर स्ट्राइक ग्रुप सामान्य रूप से काम कर रहा है और सैन्य मिशन में सक्रिय है।

अमेरिका के मुताबिक:
  • ईरानी मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं।

  • युद्धपोत पूरी तरह सुरक्षित है।

  • क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां जारी हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह युद्धपोत

USS Abraham Lincoln (CVN-72) अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली विमानवाहक युद्धपोतों में से एक माना जाता है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं:
  • यह निमित्ज श्रेणी का पांचवां परमाणु ऊर्जा से चलने वाला युद्धपोत है।

  • वर्ष 1989 में इसे अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था।

  • इसका वजन लगभग 97 हजार टन है।

  • इसकी लंबाई करीब 1092 फीट है।

  • फ्लाइट डेक लगभग 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैली है।

इस युद्धपोत पर लगभग 5000 से अधिक नौसैनिक और क्रू सदस्य तैनात रहते हैं।

युद्धपोत की ताकत

इस विमानवाहक पोत पर आधुनिक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं, जिनमें F-35C Lightning II जैसे अत्याधुनिक जेट शामिल हैं।

अन्य सुविधाएं:
  • एक साथ करीब 90 लड़ाकू विमान ले जाने की क्षमता

  • चार बड़े हैंगर एलीवेटर

  • अस्पताल, लाइब्रेरी और फायर स्टेशन जैसी सुविधाएं

  • अपना टीवी, रेडियो स्टेशन और यहां तक कि अलग जिप कोड

बढ़ता क्षेत्रीय तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव और गहरा सकता है।

हालांकि फिलहाल दोनों देशों के दावों के बीच सच्चाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह घटनाक्रम वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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