कोटा में गैस संकट: कोचिंग स्टूडेंट्स के खाने पर असर, हॉस्टल-मैस में लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर बन रहा खाना

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Mediawali news, kota

राजस्थान की कोचिंग सिटी Kota में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शहर के हॉस्टल, मैस, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को खाना बनाने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर Middle East में जारी तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर अब स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है।

हजारों कोचिंग स्टूडेंट्स के खाने पर असर

कोटा में करीब 4000 से अधिक हॉस्टल संचालित हैं। इनमें से लगभग 2500 से 3000 हॉस्टलों में छात्रों के लिए रोजाना भोजन तैयार किया जाता है। इसके अलावा कोचिंग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मैस भी चलते हैं, जहां हजारों छात्र रोजाना खाना खाते हैं।

कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण कई मैस संचालकों ने अस्थायी रूप से सेवाएं बंद कर दी हैं, जबकि कई जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर खाना बनाया जा रहा है।

मजबूरी में चूल्हों पर बन रहा खाना

कोरल पार्क क्षेत्र के एक हॉस्टल संचालक ने बताया कि उनके हॉस्टल में 50 से अधिक छात्र रहते हैं। पिछले एक दिन से गैस सिलेंडर खत्म हो चुके हैं और एजेंसियों के चक्कर लगाने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।

ऐसे में हॉस्टल के बाहर चूल्हे बनाकर लकड़ी जलाकर खाना पकाना पड़ रहा है। इससे खाना बनाने में ज्यादा समय लग रहा है, लेकिन छात्रों को भोजन की कमी नहीं होने दी जा रही।

होटल और रेस्टोरेंट कारोबार भी प्रभावित

कोटा होटल फेडरेशन के अध्यक्ष के अनुसार, कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से शहर के 300 से 400 होटल प्रभावित हो रहे हैं। सामान्य दिनों में यहां रोजाना करीब 600 सिलेंडरों की खपत होती है, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

इस कारण चाय की दुकानों से लेकर फास्ट फूड रेस्टोरेंट तक अब लकड़ी और कोयले की भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं।

शादी समारोहों पर भी पड़ सकता है असर

केटरिंग एसोसिएशन का कहना है कि अगले एक महीने में शहर में 700 से अधिक शादियां होने वाली हैं। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी से केटरिंग सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

संगठनों ने प्रशासन और गैस एजेंसियों से जल्द समाधान करने की मांग की है, ताकि छात्रों के भोजन, होटल कारोबार और शादी समारोहों की व्यवस्था प्रभावित न हो।

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