कैबिनेट का बड़ा फैसला: चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में ढील

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एफडीआई नियमों में ढील का फैसला

नई दिल्ली। Union Cabinet of India ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

इस फैसले का उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और देश में निवेश के अवसर बढ़ाना है।

प्रेस नोट 3 के नियमों में बदलाव

सरकार ने 2020 में लागू किए गए प्रेस नोट 3 के कुछ प्रावधानों में ढील दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए यह नियम लागू किया गया था।

इसके तहत चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान जैसे भारत से सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी।

यह फैसला 2020 Galwan Valley clash के बाद भारत और चीन के बीच बढ़े तनाव के दौरान लिया गया था।

भारत-चीन व्यापार के अहम आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में चीनी निवेश का हिस्सा अपेक्षाकृत कम रहा है। अप्रैल 2000 से दिसंबर 2021 के बीच भारत में हुए कुल एफडीआई प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.43% (करीब 2.45 अरब डॉलर) रही।

हालांकि व्यापार के स्तर पर चीन भारत का बड़ा साझेदार बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में चीन से भारत का आयात 113.45 अरब डॉलर रहा, जबकि निर्यात 14.25 अरब डॉलर रहा।

चालू वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारतीय निर्यात में 38% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।

कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण फैसले

एफडीआई नियमों में बदलाव के साथ-साथ कैबिनेट ने दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी है। इनमें Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) संशोधन बिल 2025 और कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक शामिल हैं।

इन बदलावों का उद्देश्य दिवाला प्रक्रिया को आसान बनाना और कंपनियों के संचालन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।

निवेश और उद्योग को मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि पड़ोसी देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील से भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने की संभावना है। इससे खासतौर पर तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है।

सरकार का यह कदम संकेत देता है कि वह भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद आर्थिक विकास और निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही है।

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