अमेरिका-ईरान युद्ध के कगार पर? मिडिल ईस्ट में सैन्य तैनाती बढ़ी, हमला संभव
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस हफ्ते ईरान पर सैन्य हमला कर सकता है, हालांकि अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिलनी बाकी है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां असाधारण रूप से बढ़ गई हैं, जिससे युद्ध की आशंका गहरा गई है।
2003 के बाद सबसे बड़ी अमेरिकी एयर तैनाती
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2003 के इराक युद्ध के बाद अपनी सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात की है। इसमें F-35, F-22, F-15 और F-16 जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट शामिल हैं। इसके अलावा कमांड एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस सिस्टम भी क्षेत्र में भेजे गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर एयर ऑपरेशन की तैयारी का संकेत मिलता है।
कई हफ्तों तक चल सकता है सैन्य ऑपरेशन
अमेरिकी न्यूज एजेंसी Axios के अनुसार, अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है तो यह कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा ऑपरेशन हो सकता है। यह पिछले महीने वेनेजुएला में हुई सीमित कार्रवाई से कहीं बड़ा होगा और संभव है कि इसमें इजराइल भी शामिल हो। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य ईरान का परमाणु और मिसाइल ढांचा हो सकता है।
इजराइल ने जताई युद्ध की आशंका
इजराइल की सैन्य खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी आमोस यादलिन ने कहा कि संघर्ष अब पहले से ज्यादा करीब है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इजराइली अधिकारियों का दावा है कि देश युद्ध की स्थिति के लिए तैयारी कर रहा है।
कूटनीतिक बातचीत जारी, लेकिन मतभेद बरकरार
तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है। जिनेवा में ट्रम्प के सलाहकारों और ईरानी विदेश मंत्री के बीच तीन घंटे की बैठक हुई, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति समझौता चाहते हैं, लेकिन रेड लाइन मुद्दों पर ईरान झुकने को तैयार नहीं है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्षेत्र में दो एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनों युद्धपोत, सैकड़ों फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। 150 से ज्यादा कार्गो उड़ानें हथियार और गोला-बारूद लेकर पहुंच चुकी हैं।
हॉर्मुज स्ट्रैट बना वैश्विक चिंता का केंद्र
हॉर्मुज स्ट्रैट दुनिया के करीब 20% तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है और सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, यूएई और ईरान का तेल यहीं से गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी तनाव से वैश्विक तेल कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मिसाइल कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद है। ईरान इसे अपनी रक्षा क्षमता का अहम हिस्सा मानता है और इस पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे।