पोस्टमार्टम हाउस में लापरवाही पर एक्शन, 3 डॉक्टरों की कमेटी करेगी जांच

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नोएडा।
सेक्टर-94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस में मृतक के शव के साथ हुई लापरवाही का मामला अब गंभीर हो गया है। मंगलवार को हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आ गया है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पोस्टमार्टम के बाद शव को ढकने के लिए न तो कफन उपलब्ध कराया गया और न ही स्टाफ की ओर से कोई मदद की गई। मजबूरन मृतक के परिजनों को खुद कपड़ा लाकर शव को ढकना पड़ा।

मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी गठित की है। इस कमेटी में डॉ. जैसलाल, डॉ. ऋषभ और डॉ. चंदन सोनी को शामिल किया गया है। कमेटी पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

सीएमओ कार्यालय में तलब होंगे डॉक्टर और स्टाफ

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन पोस्टमार्टम हाउस में तैनात डॉक्टरों और स्टाफ को सीएमओ कार्यालय बुलाया गया है। नोडल अधिकारी ने बताया कि सभी से यह स्पष्ट किया जाएगा कि इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हुई। इसके साथ ही मृतक के परिजनों से भी फोन पर बातचीत कर उनका पक्ष जाना जाएगा।

कैसे हुई पूरी घटना

जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय युवक ने आत्महत्या की थी। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए नोएडा के सेक्टर-94 स्थित पीएम हाउस भेजा। पोस्टमार्टम के बाद जब शव परिजनों को सौंपा गया, तो उसे ढकने के लिए कफन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूरी में परिजनों ने बाहर से कफन खरीदकर शव को ढका। एम्बुलेंस में शव रखे जाने के दौरान पीएम हाउस के स्टाफ ने उसी कफन पर सील की मुहर लगा दी।

यह अमानवीय दृश्य वहीं मौजूद एक व्यक्ति ने अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला लखनऊ तक पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन किया।

पोस्टमार्टम के बाद क्या हैं नियम?

  • पोस्टमार्टम के बाद शव को सम्मानपूर्वक ढकना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।

  • शव को कफन या साफ कपड़े में लपेटकर परिजनों को सौंपा जाना अनिवार्य है।

  • शव सौंपते समय परिजनों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।

  • पोस्टमार्टम हाउस में मूलभूत सुविधाएं जैसे कपड़ा, स्ट्रेचर और पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होना जरूरी है।

  • गरीब या असहाय परिजनों से किसी भी तरह की मांग करना नियमों के खिलाफ है।

  • लापरवाही पाए जाने पर संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।

Lekha
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