फार्मर आईडी में अटका किसानों का भविष्य, जमाबंदी ट्रांसफर बनी बड़ी बाधा
गौनाहा प्रखंड में जारी है फार्मर आईडी निर्माण
बिहार सरकार के निर्देश पर गौनाहा प्रखंड में फार्मर आईडी बनाने का कार्य चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन भले ही कार्य को तेज़ी से पूरा करने का दावा कर रहा हो, लेकिन हकीकत में जमाबंदी ट्रांसफर, नामांतरण और तकनीकी खामियों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
आंकड़े बता रहे हैं धीमी प्रगति
गौनाहा प्रखंड की 18 ग्राम पंचायतों से कुल 14,060 किसानों की सूची प्राप्त हुई है। इनमें से अब तक केवल 6,570 किसानों की ही फार्मर आईडी बन पाई है। आधे से अधिक किसान अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। कई पंचायतों में काम की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण किसानों में असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।
जमाबंदी और नामांतरण सबसे बड़ी समस्या
फार्मर आईडी निर्माण में सबसे बड़ी बाधा जमाबंदी ट्रांसफर और नामांतरण की है। अधिकांश किसानों की जमीन आज भी उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। पारिवारिक बंटवारा न होने और नामांतरण लंबित रहने के कारण आवेदन अटक जा रहे हैं। जमाबंदी सुधार की जटिल प्रक्रिया भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है।
किसानों की आपबीती
किसान फलजु रहमान ने बताया कि वे कई महीनों से फार्मर आईडी बनवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। कभी आधार कार्ड में नाम सुधार की जरूरत पड़ती है, तो कभी जमाबंदी में त्रुटियों के कारण आवेदन रुक जाता है। इसी तरह किसान प्लान दत्त और ईश्वर राम का कहना है कि पूर्वजों के नाम पर दर्ज जमाबंदी के चलते वे अब तक फार्मर आईडी से वंचित हैं।
तकनीकी खामियों से बढ़ी परेशानी
कई मामलों में सर्वर डाउन रहने, आवश्यक दस्तावेजों की कमी और ऑनलाइन प्रक्रिया में तकनीकी खामियों के कारण भी किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जिन किसानों के नाम जमाबंदी में दर्ज हैं, वे भी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
योजनाओं का लाभ अटका
किसानों का कहना है कि फार्मर आईडी निर्माण की धीमी गति और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण पीएम किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने प्रशासन से प्रक्रिया को सरल बनाने और समस्याओं का त्वरित समाधान करने की मांग की है।