Budget 2026: क्रिप्टो एक्सचेंज पर पेनल्टी का एलान

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केंद्रीय बजट 2026 में क्रिप्टो निवेशकों को टैक्स राहत की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स में कोई बदलाव न करते हुए क्रिप्टो इकोसिस्टम के लिए एक नया पेनल्टी फ्रेमवर्क घोषित कर दिया। यह जुर्माना सीधे तौर पर आम निवेशकों पर नहीं, बल्कि क्रिप्टो एक्सचेंज और रिपोर्टिंग एंटिटीज पर लागू होगा।

टैक्स राहत नहीं, नई सख्ती जरूर

फिलहाल क्रिप्टो प्रॉफिट पर 30 फीसदी टैक्स और 4 फीसदी सेस लागू है, वहीं अधिकतर ट्रांजैक्शन पर 1 फीसदी TDS भी कटता है। बजट 2026 में इन प्रावधानों में कोई राहत नहीं दी गई। इसके उलट, सरकार ने क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग को और सख्त बना दिया है।

किस पर और कितना लगेगा जुर्माना?

बजट में पेश नए नियमों के तहत अगर कोई क्रिप्टो एक्सचेंज क्रिप्टो-एसेट ट्रांजैक्शन का स्टेटमेंट नहीं देता है, तो उस पर ₹200 प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा अगर गलत जानकारी दी जाती है या उसे ठीक नहीं किया जाता, तो ₹50,000 का फ्लैट पेनल्टी लगेगा। यह प्रावधान क्रिप्टो में डील करने वाली एंटिटीज पर लागू होगा, न कि व्यक्तिगत निवेशकों पर।

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 509 का हवाला

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि यह कदम इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 509 का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इसका उद्देश्य क्रिप्टो एसेट्स से जुड़ी जानकारी को छिपाने या गलत रिपोर्टिंग पर रोक लगाना है।

उद्योग इसे क्यों मान रहा है पॉजिटिव?

हालांकि पहली नजर में यह फैसला सख्त लग सकता है, लेकिन क्रिप्टो इंडस्ट्री इसे सकारात्मक कदम मान रही है। जानकारों के मुताबिक, यह पेनल्टी फ्रेमवर्क क्रिप्टो सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगा और इसे मुख्यधारा के फाइनेंशियल सिस्टम के करीब लाएगा।

क्रिप्टो एक्सचेंज को मिलेगा फायदा

WazirX के संस्थापक निश्चल शेट्टी ने इस फैसले को “साफ और कंस्ट्रक्टिव” बताया। उन्होंने कहा कि इससे क्रिप्टो एक्सचेंज को PMLA के तहत रिपोर्टिंग एंटिटी के रूप में स्पष्ट पहचान मिलेगी। इससे एक्सचेंज बेहतर कंप्लायंस फ्रेमवर्क तैयार कर पाएंगे और सेक्टर को रेगुलेटरी स्पष्टता मिलेगी।

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