नोएडा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम
नोएडा के सेक्टर-34 में कचरा अब केवल समस्या नहीं, बल्कि समाधान बनता नजर आ रहा है। यहां कूड़े में फेंके जाने वाले रद्दी कागजों से बच्चों के लिए कॉपी, रजिस्टर, डायरी और पेपर ग्लास जैसी उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा रही हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि रोजगार सृजन का माध्यम भी बन रही है।
इनवायरो केयर ने शुरू किया पेपर रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट
सेक्टर-34 में इनवायरो केयर संस्था द्वारा कूड़े से पेपर रीसाइक्लिंग का काम शुरू किया गया है। सोसायटियों से एकत्र किए गए कचरे में से पहले रद्दी कागज और गत्ते को अलग किया जाता है। इसके बाद इन्हें मशीनों की सहायता से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और फिर अन्य मशीनों में भेजकर नया पेपर तैयार किया जाता है।
इस रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से कॉपी, रजिस्टर, डायरी और पेपर ग्लास जैसी कई उपयोगी चीजें बनाई जा रही हैं, जो खासतौर पर बच्चों की पढ़ाई के काम आ रही हैं।
पर्यावरण को नुकसान से बचाने की पहल
इनवायरो केयर के मैनेजर अभिजीत दत्ता के अनुसार, अब तक सेक्टर के कचरे से केवल बायोगैस और खाद बनाई जा रही थी, लेकिन अब रद्दी कागज को अलग कर उसका दोबारा उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कचरे में पड़ा कागज मिट्टी में गलने में लंबा समय लेता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। रीसाइक्लिंग से न केवल कचरे की मात्रा कम हो रही है, बल्कि पेड़ों की कटाई पर भी रोक लगाई जा सकती है।
रोजगार के नए अवसर, सुरक्षित सामग्री
रीसाइक्लिंग से तैयार की गई कॉपी और रजिस्टर बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। यूनिट की देखरेख कर रहे आशु दीक्षित ने बताया कि यहां रोजाना करीब 500 किलो रद्दी कागज को क्रश किया जा रहा है, और भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाने की योजना है।
बायोगैस से सामाजिक सेवा भी
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के महासचिव धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि सेक्टर-34 में पहले से ही कचरे से बायोगैस बनाई जा रही है। इस गैस से अस्पतालों में मरीजों के लिए रोजाना भोजन तैयार किया जाता है। यह गैस एलपीजी की तुलना में आधी कीमत पर उपलब्ध है, जिससे यह किफायती और उपयोगी साबित हो रही है।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
सेक्टर-34 की यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा—तीनों क्षेत्रों में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है। कूड़े से कॉपी बनने की यह सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए एक साफ और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम है।