पश्चिम बंगाल में घुसपैठ बना चुनावी मुद्दा, ममता बनर्जी की बढ़ीं चुनौतियां
चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में इस बार राजनीति का केंद्र बिंदु अवैध घुसपैठ और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा बनती दिख रही है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं की लगातार हो रही हत्याओं ने न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ाई है, बल्कि इसका सीधा असर बंगाल की चुनावी राजनीति पर भी पड़ता नजर आ रहा है। इस मुद्दे के चलते मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
बांग्लादेश में हिंसा से बंगाल में आक्रोश
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों की खबरों से पश्चिम बंगाल के हिंदू समाज में गहरा आक्रोश है। सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग इसे अपनी सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। इस माहौल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है। भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि राज्य में बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए मौजूद हैं, जिनके कारण स्थानीय लोगों की रोज़ी-रोटी और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं।
सीमावर्ती जिलों में सबसे ज्यादा असर
उत्तर 24 परगना, नदिया, मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग जैसे जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हुए हैं। इन जिलों में मुस्लिम आबादी की संख्या अधिक है और मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। आरोप है कि इन इलाकों में लंबे समय से रह रहे कई बांग्लादेशी घुसपैठियों ने भारतीय दस्तावेज जैसे आधार, पैन और वोटर आईडी बनवा लिए हैं। अब जांच एजेंसियां ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर रही हैं।
SIR पर टकराव: TMC बनाम BJP
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तृणमूल कांग्रेस खुलकर विरोध कर रही है। ममता बनर्जी का कहना है कि इसके जरिए वैध मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। वहीं भाजपा इसे घुसपैठियों को बचाने की कोशिश करार दे रही है। भाजपा का दावा है कि SIR के जरिए अवैध वोटरों की पहचान होगी, जबकि TMC समर्थक इसे अपने वोट बैंक पर हमला मान रहे हैं।
भाजपा का चुनावी एजेंडा और बदलाव की बात
भाजपा ने अवैध घुसपैठ, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को अपने मुख्य चुनावी मुद्दे बनाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार इन मुद्दों को उठा रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता तुहिन सिन्हा का कहना है कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती है और तृणमूल सरकार भ्रष्टाचार व अराजकता की प्रतीक बन चुकी है।
क्या बदलेगा बंगाल का सियासी समीकरण?
घुसपैठ, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा और SIR जैसे मुद्दों ने बंगाल का चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि यह मुद्दे ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ में कितनी सेंध लगा पाते हैं और क्या वाकई बंगाल की राजनीति किसी बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है।