बजट 2026: मरीज पहले?
बजट से पहले बढ़ी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा
बजट 2026 पेश होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी उम्मीदें तेज़ हो गई हैं। डॉक्टरों, अस्पतालों, दवा कंपनियों और आम मरीजों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाला बजट स्वास्थ्य सेवाओं को कितना सुलभ, किफायती और मरीज-केंद्रित बना पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
ग्रामीण इलाकों में इलाज की कमी बनी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, देश के बड़े हिस्से, खासकर ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में अब भी बेहतर इलाज की भारी कमी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, नर्सों और जरूरी मेडिकल सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर ज्यादा निवेश करेगी, ताकि हर नागरिक को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
इलाज की बढ़ती लागत पर लगाम की मांग
आम मरीजों के लिए इलाज की बढ़ती लागत भी एक बड़ी चिंता का विषय है। निजी अस्पतालों में इलाज और दवाओं का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग चाहते हैं कि बजट में सस्ती दवाओं, जनऔषधि केंद्रों और सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य बीमा पर नजर
बजट 2026 से आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को और प्रभावी बनाने की भी मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन योजनाओं का दायरा बढ़ाकर गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी जा सकती है। साथ ही, निजी और सरकारी अस्पतालों में इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की जरूरत है।
रोकथाम और शुरुआती इलाज पर जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि इलाज के साथ-साथ रोकथाम पर भी ज्यादा निवेश किया जाए। टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण कार्यक्रम और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने से बीमारियों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। इससे लंबे समय में इलाज पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
डिजिटल हेल्थ और मेडिकल शिक्षा से उम्मीदें
डिजिटल हेल्थ और टेलीमेडिसिन को लेकर भी बजट 2026 से काफी उम्मीदें हैं। इससे छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले लोग विशेषज्ञ डॉक्टरों से आसानी से सलाह ले सकेंगे। इसके अलावा, मेडिकल शिक्षा, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
मरीजों को केंद्र में रखने की मांग
कुल मिलाकर, बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्वास्थ्य नीति बनाते समय मरीजों को केंद्र में रखेगी। यदि बेहतर पहुंच, सस्ता इलाज और मजबूत रोकथाम पर ध्यान दिया गया, तो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक और लंबे समय तक असर डालने वाला बदलाव देखने को मिल सकता है।