अजीत डोभाल का बड़ा बयान: युद्ध शव देखने की खुशी के लिए नहीं, दुश्मन का मनोबल तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं

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NSA बोले– हम मनोरोगी नहीं हैं, इच्छाशक्ति ही राष्ट्रीय शक्ति बनती है; मौजूदा नेतृत्व ने 10 साल में देश की दिशा बदली


राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी दुश्मन के शव या तबाही देखकर खुशी पाने के लिए नहीं लड़े जाते, बल्कि किसी देश की इच्छाशक्ति और मनोबल को तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं। डोभाल ने साफ शब्दों में कहा, “हम मनोरोगी (साइकोपैथ) नहीं हैं कि दुश्मन के कटे हुए अंग या शव देखकर हमें सुकून मिले। लड़ाइयों का उद्देश्य यह नहीं होता।”

शनिवार को नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए NSA ने कहा कि युद्ध का असली मकसद सामने वाले देश को इस स्थिति में लाना होता है कि वह हमारी शर्तों पर आत्मसमर्पण करे और हम अपने राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल कर सकें। उनके अनुसार, युद्ध राष्ट्र की इच्छाशक्ति की परीक्षा होते हैं।

इच्छाशक्ति ही बनती है राष्ट्रीय शक्ति


अजीत डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति की इच्छाशक्ति जब मजबूत होती है, तो वही आगे चलकर राष्ट्रीय शक्ति का रूप ले लेती है। उन्होंने कहा कि केवल संसाधन, हथियार और तकनीक काफी नहीं होते। अगर किसी देश का मनोबल कमजोर है, तो उसकी सारी ताकत बेकार हो जाती है।

लीडरशिप पर दिया जोर


डोभाल ने कहा कि किसी भी देश का मनोबल बनाए रखने में मजबूत नेतृत्व की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने मौजूदा नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश आज भाग्यशाली है कि उसे ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने पिछले 10 वर्षों में भारत को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।

इतिहास से सीख लेने की जरूरत


NSA ने कहा कि भारत की आज़ादी आसान नहीं थी। हमारे पूर्वजों ने अपमान, अत्याचार और बलिदान झेले। गांव जलाए गए, सभ्यता को नुकसान पहुंचाया गया और कई लोगों ने फांसी तक स्वीकार की। उन्होंने कहा कि यह इतिहास आज के युवाओं को चुनौती देता है कि वे देश को फिर से उस गौरवशाली मुकाम तक ले जाएं।

‘बदला’ एक भावना, जो ताकत देती है


डोभाल ने कहा कि ‘बदला’ शब्द भले ही कठोर लगे, लेकिन यह एक शक्तिशाली भावना है। इसका मतलब हिंसा नहीं, बल्कि इतिहास से मिली पीड़ा को ताकत में बदलकर एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।

PM मोदी 12 जनवरी को करेंगे युवाओं से संवाद


प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के समापन सत्र में शामिल होंगे। इस दौरान वे देश-विदेश से आए 3,000 से अधिक युवाओं से संवाद करेंगे। चयनित प्रतिभागी प्रधानमंत्री के सामने 10 अलग-अलग विषयों पर अपने विचार और प्रस्तुतियां रखेंगे।

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