दिल्ली विधानसभा में बंदरों से निपटने के लिए नई व्यवस्था, लंगूर की आवाज निकालने वाले कर्मियों की होगी भर्ती
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों के लगातार घुसने और उत्पात मचाने की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने एक नई और अनोखी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। अब बंदरों को भगाने के लिए लंगूर की आवाज की नकल करने वाले लोगों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने टेंडर जारी कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, पहले भी लंगूर की आवाज निकालने वाले कर्मी तैनात थे, लेकिन उनका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो चुका है। अब वर्किंग डे और शनिवार को प्रशिक्षित कर्मियों को विधानसभा के बाहर तैनात किया जाएगा। प्रत्येक कर्मी को 8 घंटे की शिफ्ट में काम करना होगा। ये कर्मी लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को दूर भगाएंगे। योजना के तहत विशेषज्ञ अपने साथ एक लंगूर भी ला सकता है।
प्रशासन का कहना है कि विधानसभा के आसपास बड़ी संख्या में बंदर मौजूद रहते हैं, जो अक्सर तारों, डिश एंटीना और अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे न केवल सरकारी संपत्ति को क्षति होती है, बल्कि मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
अधिकारियों ने बताया कि पहले लंगूर के पुतले लगाने की योजना पर भी काम किया गया था, लेकिन बंदर अब उनसे डरना बंद कर चुके हैं और कई बार पुतलों पर ही बैठ जाते हैं। इसी वजह से अब मानव संसाधन के जरिए बंदरों को भगाने का फैसला लिया गया है। यह तरीका प्रभावी होने के साथ-साथ मानवीय भी माना जा रहा है, क्योंकि इसमें बंदरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। कर्मियों की निगरानी, सुरक्षा मानकों का पालन और बीमा कवरेज की व्यवस्था भी की जाएगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी दिल्ली में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए लंगूर के कटआउट्स और लंगूर की आवाज निकालने वाले कर्मियों की तैनाती की गई थी। उस दौरान IGI एयरपोर्ट से लेकर समिट वेन्यू, प्रमुख सड़कों और लुटियंस जोन जैसे संवेदनशील इलाकों में यह व्यवस्था लागू की गई थी।
वहीं, साल 2017 में दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक बंदर के सदन में घुस आने की घटना भी सामने आ चुकी है, जिससे कुछ समय के लिए कार्यवाही रोकनी पड़ी थी। उसी घटना के बाद से विधानसभा परिसर में बंदरों की रोकथाम को लेकर लगातार नए उपायों पर विचार किया जा रहा है।