सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने का चलन तेज, 3 साल में चार गुना बढ़ी गोल्ड लोन की मांग
नई दिल्ली
देश में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बीते तीन वर्षों में गोल्ड लोन की मांग में करीब चार गुना उछाल दर्ज किया गया है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की BFSI कॉन्फ्रेंस 2025 में विशेषज्ञों द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़त का बड़ा कारण सोने की बढ़ती कीमतें और अर्ध-शहरी व ग्रामीण भारत से आ रही मजबूत मांग है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत से आ रही 60% से ज्यादा मांग
रिपोर्ट के अनुसार, अब 60 प्रतिशत से अधिक नए खुदरा कर्ज की मांग अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों से आ रही है। इन क्षेत्रों में सोना पारंपरिक रूप से सिर्फ आभूषण ही नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद संपत्ति और कोलैटरल के रूप में स्वीकार किया जाता है। आसान उपलब्धता और त्वरित कर्ज प्रक्रिया के चलते लोग असुरक्षित कर्ज के बजाय गोल्ड लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
3 लाख करोड़ के पार पहुंचा गोल्ड लोन बकाया
रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 के अंत तक गोल्ड लोन पर कुल बकाया सालाना आधार पर 128.5% बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा बताता है कि गोल्ड लोन अब देश के कर्ज बाजार में तेजी से अपनी जगह बना रहा है।
डिफॉल्ट को लेकर भी जताई गई चिंता
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में डिफॉल्ट का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है। इसके बावजूद, तेजी से वितरण, लचीले पुनर्भुगतान विकल्प और अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों के कारण गोल्ड लोन इन क्षेत्रों में पसंदीदा विकल्प बना हुआ है।
कठोर एनपीए नियमों के बीच गोल्ड लोन बना सुरक्षित विकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब बैंकों के लिए फंसे कर्ज (एनपीए) को लेकर नियम सख्त हो चुके हैं, गोल्ड लोन एक सुरक्षित और बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। कई बैंकों ने संकेत दिए हैं कि वे अगले दो वर्षों में अपने ब्रांच नेटवर्क के जरिए गोल्ड लोन वितरण को और विस्तार देंगे।
आरबीआई रिपोर्ट में भी दर्ज हुई तेज बढ़त
हाल ही में आरबीआई की एक रिपोर्ट में भी यह सामने आया है कि फरवरी 2025 से सोने की ज्वेलरी पर लिए जाने वाले लोन में तीन अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि कुल बैंक कर्ज की रफ्तार से कहीं अधिक है।
हालांकि गोल्ड लोन अभी भी कुल गैर-खाद्य कर्ज का छोटा हिस्सा है, लेकिन बीते एक साल में इसका हिस्सा लगभग दोगुना हो गया है। यह बदलाव भारतीय उपभोक्ताओं की कर्ज लेने की सोच में हो रहे परिवर्तन को साफ तौर पर दर्शाता है।
कर्ज बाजार में बदलती प्रवृत्ति का संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती अनिश्चितता और महंगाई के दौर में लोग अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखते हुए, सोने के बदले कर्ज लेना ज्यादा व्यवहारिक समझ रहे हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में गोल्ड लोन सेगमेंट के और तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।