सवा लाख वाहन गाजियाबाद–दिल्ली के एटीएस पर निर्भर
नोएडा के दोनों ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर अब तक नहीं हो सके शुरू
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1 जनवरी से मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया होगी पूरी तरह समाप्त
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ई-रिक्शा से लेकर भारी ट्रकों तक को जाना पड़ेगा दूसरे शहरों में
नोएडा। परिवहन विभाग एक जनवरी से वाहनों की फिटनेस जांच की नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत अब मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी और सभी वाणिज्यिक वाहनों की जांच केवल एटीएस (ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर) में हाईटेक मशीनों के माध्यम से होगी। लेकिन समस्या यह है कि नोएडा में तैयार किए गए दोनों एटीएस सेंटर अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। ऐसे में जनपद के करीब सवा लाख वाणिज्यिक वाहन गाजियाबाद और दिल्ली के एटीएस सेंटरों पर निर्भर रहेंगे।
31 दिसंबर तक चलेगी पुरानी व्यवस्था
सेक्टर-32ए स्थित उप संभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार अभी तक फिटनेस की प्रक्रिया हस्तचालित यानी मैनुअल तरीके से की जा रही है। परिवहन विभाग की टीम रोजाना वाहनों की फिटनेस जांच करती है। यह व्यवस्था 31 दिसंबर तक जारी रहेगी, लेकिन एक जनवरी से विभागीय फिटनेस जांच पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
ग्रेटर नोएडा में तैयार हैं दो एटीएस, संचालन अटका
परिवहन विभाग ने पारदर्शिता और तेज प्रक्रिया के उद्देश्य से जनपद में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में दो एटीएस सेंटर तैयार कर लिए हैं। हालांकि, तकनीकी और प्रशासनिक कमियों के चलते इनका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों का कहना है कि इन सेंटरों का संचालन सीधे शासन स्तर से नियंत्रित हो रहा है, ऐसे में इनके शुरू होने की तिथि को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
वाहन मालिकों की बढ़ेगी परेशानी
एटीएस शुरू न होने की स्थिति में जनपद के सवा लाख से अधिक कमर्शियल वाहन मालिकों को फिटनेस कराने के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ेगा। इससे न केवल समय और ईंधन का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा, बल्कि रोजमर्रा की कमाई भी प्रभावित होगी। वाहन स्वामियों में इसे लेकर असमंजस और नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।
रोजाना होती है औसतन 50 वाहनों की फिटनेस
वर्तमान व्यवस्था के तहत परिवहन विभाग रोजाना करीब 50 कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच करता है। सभी व्यावसायिक वाहनों को निर्धारित अवधि में फिटनेस कराना अनिवार्य होता है, जिसके लिए वाहन स्वामियों को पहले से आवेदन करना पड़ता है।
क्या है फिटनेस जांच की प्रक्रिया
परिवहन विभाग के अनुसार कमर्शियल वाहनों को शुरुआती आठ वर्षों में हर दो साल में फिटनेस करानी होती है। इसके बाद हर साल फिटनेस जांच अनिवार्य होती है।
ई-रिक्शा के लिए नियम थोड़े अलग हैं। दो साल पूरे होने के बाद ई-रिक्शा की फिटनेस करानी होती है और तीसरे साल से हर वर्ष फिटनेस टेस्ट अनिवार्य हो जाता है।
प्रदेश में 13 जिलों में संचालित हैं 15 एटीएस सेंटर
परिवहन विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में फिलहाल 15 एटीएस सेंटर संचालित हो रहे हैं। इन्हें और बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में गौतमबुद्ध नगर में भी दो एटीएस तैयार किए गए हैं।
1 जनवरी 2026 से मैनुअल फिटनेस सिस्टम पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा, इसके बाद फिटनेस केवल एटीएस के जरिए ही संभव होगी।
हाईटेक मशीनों से होगी वाहनों की जांच
एटीएस सेंटर में वाहनों की जांच रोलर ब्रेक टेस्टर, सस्पेंशन टेस्टर, साइड-स्लिप टेस्टर, जॉइंट-प्ले टेस्टर और स्पीडोमीटर जैसी आधुनिक मशीनों से की जाएगी।
ये सभी उपकरण डिजिटल सिस्टम से जुड़े होंगे और रिपोर्ट सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड होगी। ब्रेक, सस्पेंशन, लाइट, साइड स्लिप और उत्सर्जन स्तर की जांच कुछ ही मिनटों में पूरी कर ली जाएगी और वाहन मालिक को तुरंत फिटनेस रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।
एक जनवरी से वाहनों की फिटनेस जांच की मैनुअल प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। अब फिटनेस संबंधित जिले या आसपास के जिलों में स्थापित एटीएस सेंटरों पर ही कराई जा सकेगी।
— नंद कुमार, एआरटीओ (प्रशासन), गौतमबुद्ध नगर