आईपीओ निवेश के नाम पर ठगी मामले में देहरादून से आरोपी गिरफ्तार, 16 केस दर्ज
देहरादून/ग्रेटर नोएडा। आईपीओ में निवेश कराने के बहाने करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के मामले में देहरादून से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी अपने खाते के माध्यम से ठगी की रकम ट्रांसफर कराता था। पुलिस के मुताबिक, 23 वर्षीय आरोपी आशीष पाल के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कुल 16 प्राथमिकी दर्ज हैं।
ग्रेटर नोएडा के व्यापारी से की गई ठगी
ग्रेटर नोएडा के आम्रपाली लीजर वैली टेकजोन सोसायटी में रहने वाले व्यापारी नवीन कैंथ ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर को एक अनजान नंबर के संपर्क में आए। उस नंबर के माध्यम से उन्हें शेयर मार्केट में निवेश कराने का झांसा दिया गया।
निवेश के बाद मुनाफा निकालने के लिए कहा गया, लेकिन जब आवश्यक राशि नहीं दी जा सकी तो ठगों ने नवीन से संपर्क काट लिया। नवीन के अनुसार, कुल 81.80 लाख रुपये की ठगी हुई, जिसमें 7.30 लाख रुपये सीधे आरोपी आशीष के खाते में ट्रांसफर किए गए।
आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ
डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस ने बीते रविवार को केस दर्ज कर जांच शुरू की। बुधवार को देहरादून से आशीष पाल को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पास से मोबाइल बरामद किया गया। पूछताछ में आशीष ने बताया कि उसके खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी और इसके लिए गिरोह के अन्य सदस्य उसे 50 हजार रुपये देते थे।
आरोपी की गिरोह से जुड़ने की कहानी
आशीष ने पुलिस को बताया कि उसकी मुलाकात गिरोह के सदस्यों से फेसबुक पर हुई। आरोपियों ने उसे अपने नाम पर खाता खोलकर देने की पेशकश की। आशीष ने करेंट पाल एंटरप्राइज़ेज के नाम से करेंट अकाउंट खोलकर उन्हें दे दिया। इसके बाद आरोपी को लखनऊ बुलाया गया, जहां वह छह दिन रुके और फिर घर भेज दिया गया।
पुलिस ने आरोपी के खाते की जांच की तो इसमें 99 लाख से अधिक रुपये के ट्रांजैक्शन मिले।
अन्य राज्यों में दर्ज मामले
आरोपी के खिलाफ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न जिलों में कुल 16 केस दर्ज हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही है।
इस गिरफ्तारी के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर या सोशल मीडिया संपर्क से निवेश करने से पहले पूरी जानकारी और वैधता की पुष्टि करें, ताकि ऐसे मामलों में ठगी से बचा जा सके