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सोना-चांदी की रिकॉर्ड तेजी: अभी खरीदें या रुकें?

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोना और चांदी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। सोना जहां निवेशकों को स्थिरता और सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, वहीं चांदी रिटर्न के मामले में उसे पीछे छोड़ती नजर आ रही है। ऐसे माहौल में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस स्तर पर और खरीदारी की जाए या ऊंचे दामों पर थोड़ा इंतजार करना ज्यादा समझदारी होगी।

क्यों मजबूत बना हुआ है सोना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी ने सोने को मजबूती दी है। यही वजह है कि सोना लंबे समय से महंगाई और बाजार जोखिम के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है।
निवेश सलाहकारों का कहना है कि सोना पोर्टफोलियो का “एंकर” होता है, जो शेयर बाजार में गिरावट या अस्थिरता के समय संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

चांदी में क्यों दिख रही है ज्यादा तेजी?

चांदी इस समय दोहरी भूमिका निभा रही है। एक तरफ यह कीमती धातु है और दूसरी ओर इसका औद्योगिक इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ती मांग ने चांदी की कीमतों को जबरदस्त सपोर्ट दिया है।
इसी वजह से हाल के महीनों में चांदी ने रिटर्न के मामले में सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि चांदी में उतार-चढ़ाव सोने के मुकाबले ज्यादा रहता है, इसलिए इसमें जोखिम भी अधिक है।

रिकॉर्ड दामों पर निवेश की क्या हो रणनीति?

बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा रिकॉर्ड स्तरों पर एकमुश्त बड़ी खरीदारी से बचना बेहतर हो सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए किस्तों में निवेश (SIP जैसे तरीके) ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जाती है। इससे ऊंचे और नीचे—दोनों स्तरों पर खरीद का फायदा मिलता है और जोखिम भी कम होता है।

पोर्टफोलियो में कितना हो हिस्सा?

विशेषज्ञों की सलाह है कि सोना-चांदी को पोर्टफोलियो में संतुलित तरीके से शामिल किया जाए। आमतौर पर कुल निवेश का सीमित हिस्सा ही कीमती धातुओं में रखने की सलाह दी जाती है, ताकि ज्यादा उतार-चढ़ाव से बचा जा सके और बाकी एसेट क्लास में भी ग्रोथ का मौका मिले।

कुल मिलाकर, सोना और चांदी दोनों ही फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन रिकॉर्ड ऊंचाई पर निवेश करते समय अनुशासन और लंबी अवधि की सोच बेहद जरूरी है। निवेश से पहले अपने लक्ष्य, समय-सीमा और जोखिम क्षमता को समझना ही सबसे सही रणनीति मानी जा रही है।

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