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भारत में दौलत की खाई गहरी: टॉप 10% के पास दो-तिहाई संपत्ति

वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

नई दिल्ली: भारत में आर्थिक असमानता बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है। बुधवार को जारी वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल संपत्ति का लगभग 65% हिस्सा केवल शीर्ष 10% अमीर लोगों के पास है। इसके उलट, निचले 50% भारतीयों के पास महज़ 6.4% संपत्ति—यह वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक असमान देशों की श्रेणी में भारत को खड़ा करता है।

1% अमीरों के पास ही 40% संपत्ति

रिपोर्ट संपादकों—लुकास शोंसेल, रिकार्डो गोमेज़-करेरा, रोवैदा मोश्रिफ और थॉमस पिकेटी—ने बताया कि देश के सबसे अमीर 1% के पास ही करीब 40% राष्ट्रीय संपत्ति है। यह आंकड़ा दिखाता है कि आर्थिक संसाधनों का वितरण कितना असंतुलित है।

आय असमानता भी बेहद गहरी

रिपोर्ट में आय वितरण की तस्वीर भी चिंताजनक है—

  • टॉप 10% लोग कुल आय का 58% कमाते हैं

  • जबकि बाकी 90% आबादी आधे से भी कम आय में गुज़ारा करती है

यह तय करता है कि समाज के बड़े वर्ग के पास आर्थिक अवसर कितने सीमित हैं।

महामारी के बाद असमानता और बढ़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड महामारी ने इस खाई को और गहरा कर दिया।

  • अमीर वर्ग की संपत्ति तेजी से बढ़ी

  • जबकि नौकरी, आय और बचत में भारी नुकसान झेलने वाले मध्यम और गरीब वर्ग और पीछे चले गए

मध्यम वर्ग की स्थिति भी कमजोर

रिपोर्ट कहती है कि भारत का मिडिल क्लास अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुकाबले बेहद कमजोर है। उनकी संपत्ति की हिस्सेदारी कम होने से भविष्य की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।

अर्थशास्त्रियों का संदेश—सुधार ज़रूरी

विशेषज्ञों ने असमानता कम करने के लिए कई ठोस कदम सुझाए—

  • कर प्रणाली में सुधार

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करना

  • स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं में निवेश बढ़ाना

  • रोजगार के बेहतर अवसर पैदा करना

वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट साफ कहती है—
भारत की विकास यात्रा तब तक अधूरी है, जब तक आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से न पहुँचे।

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