प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर साधा निशाना
नई दिल्ली। संसद में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर लोकसभा में विशेष चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की और अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के कई ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने वंदे मातरम को लेकर हुए विवादों के लिए पिछले नेताओं और विपक्षी राजनीति पर निशाना साधा।
जिन्ना और मुस्लिम लीग का विरोध उठा पीएम के भाषण में
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग का जिक्र करते हुए कहा कि वंदे मातरम का विरोध उसी दौर से शुरू हुआ। उन्होंने तंज किया कि “जिन्ना की वजह से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा, इसलिए दबाव में निर्णय लिए गए।”
गांधी के विचारों का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने 2 दिसंबर 1905 को महात्मा गांधी द्वारा लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय वंदे मातरम की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि गांधी स्वयं इसे राष्ट्रगान के रूप में देखते थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में बंगाल में लाखों लोग एक स्वर में वंदे मातरम गाते थे और यह गीत स्वदेशी आंदोलन की प्रेरणा का स्रोत था।
गांधी के कथन को पढ़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहा—
“वंदे मातरम की भावनाएं महान हैं, यह अन्य राष्ट्रों के गीतों से अधिक मधुर है और इसका उद्देश्य देशभक्ति की भावना जगाना है।”
‘इतना बड़ा अन्याय क्यों हुआ?’— PM का सवाल
प्रधानमंत्री मोदी ने सवाल उठाते हुए कहा कि बीते सौ वर्षों में वंदे मातरम के साथ ‘अन्याय’ और ‘विश्वासघात’ क्यों हुआ? उन्होंने पूछा कि ऐसा कौन-सा प्रभाव था जिसने गांधी की भावनाओं को भी पीछे छोड़ दिया और वंदे मातरम जैसे पवित्र गीत को विवादों में लाकर खड़ा कर दिया।
सत्ता-विपक्ष के बीच टकराव
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वंदे मातरम जैसे राष्ट्रभावना से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक कारणों से विवादित बनाए गए। हालाँकि विपक्षी दलों ने इस दौरान अपनी आपत्तियाँ भी दर्ज कराईं।