संसद में ‘वंदे मातरम’ पर आज होगी बहस; BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
संसद में ‘वंदे मातरम’ पर होने वाली बहस से पहले ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने कांग्रेस और पंडित जवाहरलाल नेहरू पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ मुस्लिम समाज को ‘इरिटेट’ कर सकता है।
नेहरू पर आरोप: ‘वंदे मातरम’ को समझने के लिए शब्दकोश का सहारा
बीजेपी नेता पात्रा ने कहा कि नेहरू ने ‘आनंद मठ’ अंग्रेजी संस्करण में पढ़ा, जबकि भारतीय भाषाओं में इसका अनुवाद वर्षों पहले उपलब्ध था। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू को ‘वंदे मातरम’ समझने के लिए शब्दकोश की मदद लेनी पड़ी, जो उनकी विरासत पर सवाल खड़ा करता है।
पात्रा ने कहा कि सोमवार को संसद में जब वंदे मातरम पर चर्चा होगी, तब “नेहरू का झूठा और विकृत सेकुलरिज्म” देश के सामने आएगा।
कांग्रेस की विरासत पर भी हमलावर BJP
सोनिया गांधी द्वारा लगाए गए आरोप—कि BJP ने नेहरू की विरासत मिटाने की कोशिश की—पर संबित पात्रा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने नेहरू की छवि बनाए रखने के लिए सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे नेताओं की विरासत को दबाया।
पात्रा ने एक पुराना कार्टून भी दिखाया, जो 2012 तक एनसीईआरटी की किताबों में शामिल था। इसमें नेहरू को कोड़ा चलाते और आंबेडकर को संविधान बनाते हुए दर्शाया गया था। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है।
‘नेहरू पहले प्रधानमंत्री नहीं होते’—पात्रा का दावा
बीजेपी सांसद ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस ने सही चयन प्रक्रिया अपनाई होती, तो पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री नहीं होते।
उन्होंने कहा कि नेहरू ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से सिर्फ छह दिन पहले ‘आनंद मठ’ पढ़ा था और वह भी “कठिनाई से अंग्रेजी संस्करण” हासिल करके।
‘नेहरू की विरासत खुद ही कमजोर’—BJP का कटाक्ष
संबित पात्रा ने कहा कि नेहरू की विरासत को मिटाने की आवश्यकता ही नहीं है। उनके शब्दों में—
“जो व्यक्ति वंदे मातरम जैसी सरल भावना नहीं समझ पाया, वह विरासत गढ़ने वाला हो ही नहीं सकता।”