राजनाथ सिंह का बड़ा आरोप: नेहरू चाहते थे बाबरी मस्जिद पर सरकारी खर्च
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम में दावा किया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बाबरी मस्जिद के निर्माण में सरकारी पैसे का इस्तेमाल करना चाहते थे। लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसे रोक दिया। राजनाथ सिंह सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर आयोजित यूनिटी मार्च में शामिल हुए और साधली गांव में लोगों को संबोधित किया।
सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए पटेल का विरोध
राजनाथ सिंह ने बताया कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर नेहरू ने पहले सवाल उठाए थे। पटेल ने साफ किया था कि मंदिर का निर्माण जनता द्वारा दान किए गए पैसों से हुआ था और सरकार का एक भी पैसा इसमें नहीं लगा। इसी तरह नेहरू बाबरी मस्जिद पर सरकारी खर्च करना चाहते थे, लेकिन पटेल ने इसका विरोध किया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से पटेल को मिला सम्मान
राजनाथ सिंह ने कहा कि नेहरू ने खुद को भारत रत्न से सम्मानित किया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर सरदार पटेल को सही सम्मान दिया। उन्होंने इसे सराहनीय कदम बताया और कहा कि इससे देश को संदेश मिलता है कि पटेल के योगदान को अब सही पहचान मिल रही है।
1946 का कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और पटेल का योगदान
राजनाथ सिंह ने 1946 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकांश प्रदेश समितियों ने पटेल को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन गांधीजी के आग्रह पर पटेल ने अपना नाम वापस ले लिया और नेहरू अध्यक्ष बने। उन्होंने कहा कि अगर पटेल उस समय प्रधानमंत्री बनते तो कश्मीर की स्थिति आज अलग होती।
हैदराबाद एकीकरण और अनुच्छेद 370 पर टिप्पणी
रक्षा मंत्री ने कहा कि हैदराबाद के एकीकरण के दौरान पटेल ने संवाद में विश्वास किया, लेकिन जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए। उन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया और वर्तमान केंद्र सरकार के ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण दिया।
जनता के पैसे का इस्तेमाल और उम्र को लेकर गलत धारणा
राजनाथ सिंह ने दावा किया कि पटेल के निधन के बाद नेहरू ने उनके स्मारक के लिए जुटाई गई जनता की राशि को कुएं और सड़क निर्माण में लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर भी जनता के पैसों से बना, सरकारी धन इसमें नहीं लगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह गलत है कि पटेल प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे क्योंकि वे उम्रदराज़ थे।