भारत में ग्रीन रियल एस्टेट को बढ़ावा: CII-IGBC और GRESB में समझौता

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मुंबई में आयोजित 23वें ग्रीन बिल्डिंग कांग्रेस 2025 के दौरान भारत के ग्रीन रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया। इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (CII-IGBC) और ग्लोबल रियल एस्टेट सस्टेनेबिलिटी बेंचमार्क (GRESB) के बीच एक अहम समझौता (MoU) हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में ग्रीन फाइनेंस को बढ़ावा देना और नेट-जीरो बिल्डिंग विकास को तेज करना है। यह साझेदारी आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को नई दिशा दे सकती है।

ग्रीन फाइनेंस को मजबूत करने की रणनीति

दोनों संस्थाओं के बीच हुई इस साझेदारी के तहत डेवलपर्स, बैंकिंग संस्थानों, निवेशकों और नीति निर्माताओं को साथ लेकर ग्रीन लोन, ESG आधारित वित्तीय साधन और विशेष फंडिंग मॉडल विकसित किए जाएंगे। इसका मकसद ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए आसान वित्त उपलब्ध कराना है जो IGBC रेटिंग और GRESB मानकों का पालन करते हैं। इससे प्रोजेक्ट्स अधिक बैंक योग्य बनेंगे और निवेशकों के लिए आकर्षक भी।

ग्रीन प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ने से रियल एस्टेट क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल निर्माण, ऊर्जा दक्षता और कम कार्बन उत्सर्जन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही जोखिम मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी, जिससे दीर्घकालिक निवेश को सुरक्षा और स्थिरता मिलेगी।

 MoU पर वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किए हस्ताक्षर

यह समझौता GRESB की चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर रॉक्साना वैन डेन बर्ग और CII-ग्रीन बिज़नेस सेंटर के कार्यकारी निदेशक के. एस. वेंकटागिरी द्वारा साइन किया गया। दोनों ने कहा कि भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के लिए एक समान डेटा मानक और統 סדרबद्ध फ्रेमवर्क बेहद आवश्यक है। इससे बैंक और निवेशक आसानी से यह तय कर सकेंगे कि कौन-से प्रोजेक्ट्स लंबे समय के लिए सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल हैं।

बैंकिंग सेक्टर पहले ही दिखा चुका है रुचि

CII-IGBC के मुताबिक नेशनल हाउसिंग बैंक अब तक ₹2,200 करोड़ से अधिक निवेश IGBC प्रमाणित ग्रीन प्रोजेक्ट्स में कर चुका है। वहीं, SIDBI, SBI, HDFC, ICICI, स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसे प्रमुख बैंक ग्रीन होम लोन, ग्रीन बॉन्ड और कम दरों पर फाइनेंसिंग उपलब्ध करा रहे हैं। यह दिखाता है कि भारतीय वित्तीय संस्थान भी सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

भारतीय प्रोजेक्ट्स को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचान

IGBC सर्टिफिकेशन को क्लाइमेट बॉन्ड्स इनिशिएटिव और एशियन डेवलपमेंट बैंक सहित कई वैश्विक संगठनों से मान्यता प्राप्त है। इससे भारत में विकसित ग्रीन प्रोजेक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और ग्लोबल सस्टेनेबल फाइनेंस पूलों तक सीधी पहुंच मिल सकती है। यह कदम भारतीय रियल एस्टेट के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा।

 नेट-जीरो भविष्य की दिशा में बड़ा कदम

CII-IGBC और GRESB के बीच हुआ यह साझेदारी समझौता भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता, पारदर्शिता और निवेश बढ़ाने का मार्ग खोलता है। यह न केवल ग्रीन प्रोजेक्ट्स के विस्तार को गति देगा, बल्कि भारत को नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में भी मजबूत आधार प्रदान करेगा। आने वाले समय में यह MoU भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर को पर्यावरण-समर्थित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

navya seth
navya seth
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