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मंगल पर पहली बार आकाशीय बिजली का संकेत, वैज्ञानिकों ने किया दावा

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पेरिस/नासा: वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मंगल ग्रह की वायुमंडलीय गतिविधियों में पहली बार विद्युतीय निर्वहन यानी बिजली जैसी घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। इसका मतलब यह है कि मंगल पर भी पृथ्वी की तरह आकाशीय बिजली होने की संभावना है। यह खोज नासा के पर्सिवियरेंस रोवर द्वारा की गई है, जो वर्ष 2021 से मंगल के जेज़ेरो क्रेटर क्षेत्र में अध्ययन कर रहा है।

पर्सिवियरेंस रोवर ने पकड़ी “मिनी लाइटनिंग”

पर्सिवियरेंस रोवर के सुपरकैम इंस्ट्रूमेंट ने ऑडियो और विद्युत चुंबकीय संकेतों के जरिए छोटे-छोटे इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज दर्ज किए, जिन्हें वैज्ञानिकों ने “मिनी लाइटनिंग” जैसा बताया। फ्रांस की एक शोध टीम ने रोवर द्वारा भेजी गई करीब 28 घंटे की माइक्रोफोन रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया। यह रिकॉर्डिंग लगभग दो मंगल वर्षों (लगभग 1,374 पृथ्वी दिनों) की अवधि में ली गई थी।

धूल भंवर और तूफानों में मिली यह गतिविधि

शोध में पाया गया कि यह विद्युत निर्वहन ज्यादातर धूल भरे तूफानों और धूल भंवर (Dust Devils) के दौरान हुआ। धूल भंवर छोटे-छोटे घुमावदार तूफान होते हैं, जो सूर्य की गर्मी से उठती हवा के कारण बनते हैं। इनके अंदर हवा और धूल की तेज गति से इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा होता है, जो आखिरकार बिजली जैसी ध्वनि उत्पन्न करता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार– खोज है बेहद महत्वपूर्ण

इस अध्ययन के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बपतिस्ट चिडे ने कहा कि यह खोज मंगल के वातावरण, रसायन विज्ञान, जलवायु, जीवन की संभावना और भविष्य के मानव मिशनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब मंगल भी पृथ्वी, बृहस्पति और शनि की तरह उन ग्रहों में शामिल हो गया है, जहां वायुमंडलीय बिजली दर्ज की गई है।

कुछ वैज्ञानिकों ने जताई सावधानी

हालांकि सभी वैज्ञानिक इस निष्कर्ष से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। पार्टिकल फिजिसिस्ट डॉ. डैनियल प्रिचार्ड का कहना है कि यह विद्युत गतिविधि केवल सुनी गई है, देखी नहीं गई, इसलिए इसे अभी अंतिम रूप से साबित नहीं कहा जा सकता। इस विषय पर आगे और शोध की आवश्यकता है।

पिछली खोजों ने भी जगाई जीवन की उम्मीद

2025 में वैज्ञानिकों ने मंगल पर कुछ अनोखे चट्टानी निशान पाए थे जिन्हें “लीपर्ड स्पॉट्स” और “पॉपी सीड्स” नाम दिया गया। इनमें ऐसे खनिज मिले जो रासायनिक प्रक्रियाओं से बने और संभव है कि इनका संबंध प्राचीन माइक्रोब्स से रहा हो। माना जाता है कि अरबों साल पहले मंगल गर्म, नम और जीवन के अनुकूल था।

भविष्य के मिशनों को मिल सकता है बड़ा फायदा

पर्सिवियरेंस को जेज़ेरो क्रेटर पर इसलिए भेजा गया था क्योंकि यह क्षेत्र सूक्ष्म जीवन की संभावनाओं का संकेत देता है। अब मिली नई खोजें मंगल ग्रह के मौसम और विकास को समझने में बड़ा योगदान देंगी और मनुष्य के भविष्य के मंगल मिशनों के लिए दिशा तय कर सकती हैं।

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