नोएडा में 30 हजार से ज्यादा पुरानी गाड़ियों की आरसी रद्द
जनता पर बढ़ा दबाव 10 हजार वाहनों को मिली अस्थायी राहत
शहर में पुराने वाहनों पर सख्ती लगातार बढ़ रही है। परिवहन विभाग की कार्रवाई का सीधा असर अब आम जनता पर दिखने लगा है। पिछले तीन महीनों में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों की करीब 30 हजार से ज्यादा आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) रद्द हो चुकी हैं। इससे हजारों लोग अचानक अपने रोजमर्रा के सफर और कमाई के साधन को लेकर परेशान हैं।सेक्टर-32 ए स्थित परिवहन विभाग के अधिकारी नंद कुमार के अनुसार अगस्त से अक्टूबर के बीच हर महीने लगभग 10 हजार वाहनों की आरसी रद्द की गई। विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में 10,197 वाहन, सितंबर में 10,310 वाहन और अक्टूबर में 10,409 वाहन की आरसी रद्द हुई। इनमें निजी कारें, स्कूटर, बाइक, टैक्सी और कमर्शियल वाहन सभी शामिल हैं। नियमों के तहत 10 साल पूरे कर चुके डीजल वाहन और 15 साल पूरे कर चुके पेट्रोल वाहन अब सड़क पर नहीं चल सकते। बड़े पैमाने पर आरसी रद्द होने से उन लोगों को भारी परेशानी हो रही है, जिनकी रोजी-रोटी इन्हीं वाहनों पर निर्भर थी।
जनता पर असर… सफर मुश्किल, जेब पर बोझ
नियम लागू होने के बाद कई परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। नए वाहन खरीदना आसान नहीं है। खासकर उस वर्ग के लिए जो रोजाना शहर में आना-जाना करता है या जिन्होंने वाहन को कमाई का साधन बनाया है। कई लोग अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट या शेयरिंग कैब पर निर्भर हो गए हैं। टैक्सी या ऑटो चलाने वाले कई ड्राइवर अब नए वाहन लेने के लिए लोन के चक्कर काट रहे हैं। मध्यम वर्ग पर अचानक नया वाहन लेने का दबाव बढ़ गया है। फिलहाल 10 हजार वाहनों को फिटनेस कराने के बाद दो साल के लिए अस्थायी राहत मिली है।
फिटनेस सर्टिफिकेट के बाद मिली अस्थायी छूट अगस्त- 2,859 वाहनसितंबर- 3,037 वाहनअक्टूबर- 3,090 वाहनकुल मिलाकर लगभग 9 हजार वाहनों को एनओसी जारी हो चुकी है। ये वाहन अभी एक या दो साल और चल सकते हैं। इससे उन परिवारों और ड्राइवरों को थोड़ी राहत मिली है, जो अचानक वाहन बदलने की स्थिति में नहीं थे।
सरकार का कहना है कि यह कदम प्रदूषण कम करने और एनसीआर में साफ हवा बनाए रखने के लिए उठाया गया है। लेकिन दूसरी तरफ आम जनता का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी संख्या में आरसी रद्द होने से सबसे ज्यादा असर मध्यम और निचले वर्ग के लोगों पर पड़ा है।
कई नागरिकों का मानना है…
वाहन बदलने के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए था। पुरानी गाड़ियों के लिए कोई वैकल्पिक योजना बनाई जानी चाहिए थी। इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी बढ़ाई जानी चाहिए ताकि लोग आसानी से बदलाव अपना सकें। अगले महीनों में और भी कड़ाई की तैयारी है।परिवहन विभाग की कार्रवाई रुकेगी नहीं। संकेत हैं कि आने वाले महीनों में भी पुराने वाहनों की पहचान कर आरसी रद्द करने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इससे शहर में पुराने वाहनों की संख्या तेजी से घटेगी, लेकिन जनता की दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं।