नोएडा और ग्रेटर नोएडा में दिसंबर से शुरू होंगे दो एटीएस सेंटर, मिनटों में होगी वाहनों की फिटनेस जांच
अब तक एआरटीओ ऑफिस में मैनुअल तरीके से होती थी फिटनेस जांच
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। दिसंबर की शुरुआत से जिले में दो ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर (ATS) शुरू होने जा रहे हैं—एक वैद्यपुरा (ग्रेटर नोएडा) और दूसरा जेवर में। यहाँ वाहनों की फिटनेस अब पूरी तरह मशीनों से होगी। इससे न केवल जांच प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि पूरी व्यवस्था पारदर्शी और निष्पक्ष भी बनेगी।
एआरटीओ नंद कुमार के अनुसार, वर्तमान में फिटनेस जांच के लिए रोजाना लंबी लाइनें लगती हैं और वाहन मालिकों को समय की बर्बादी झेलनी पड़ती है। कई बार अधिक भीड़ के कारण वाहन फिटनेस के बिना ही वापस लौट जाते हैं। नए एटीएस केंद्रों से यह समस्या खत्म होगी और लोगों का समय व पैसा दोनों बचेंगे।
मैनुअल फिटनेस टेस्ट में कौन-कौन सी दिक्कतें आती थीं
- लंबा इंतजार और कतारें
- कर्मचारियों पर अत्यधिक काम का दबाव
- मानव त्रुटि (Human Error) की संभावना
- धीमी प्रक्रिया और समय की बर्बादी
- कई बार वाहनों की सही स्थिति का आकलन न हो पाना
कैसे बदलेगा फिटनेस सिस्टम
- अब तक फिटनेस जांच पूरी तरह मैनुअली की जाती थी, जहां कर्मचारियों के अनुभव और क्षमता पर निर्भरता अधिक थी।
- नए एटीएस सेंटरों में यह जिम्मेदारी निजी कंपनियों के पास होगी, जो पूरी जांच अत्याधुनिक मशीनों से करेंगी।
- उप परिवहन अधिकारी (सेक्टर 32A) के अनुसार, अगले 15 दिनों में दोनों सेंटर शुरू हो जाएंगे।
- कैसे होगा ऑटोमैटिक फिटनेस टेस्ट? (स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया)
वाहन को मशीनों पर चढ़ाया जाएगा, और फिर:
1. रोलर ब्रेक टेस्टर
ब्रेक की क्षमता और संतुलन जांचेगा।
2. सस्पेंशन टेस्टर
वाहन की पकड़ और सड़क पर बैलेंस का परीक्षण करेगा।
3. साइड-स्लिप टेस्टर
बताएगा कि वाहन पटरी से तो नहीं खिसक रहा।
4. जॉइंट-प्ले टेस्टर
वाहन के महत्वपूर्ण जोड़ों की स्थिति बताएगा।
5. स्पीड मीटर टेस्टर
गति की सटीकता मापेगा।
सभी मशीनें सेंट्रल सर्वर से कनेक्टेड होंगी और रिपोर्ट तुरंत सॉफ्टवेयर पर तैयार होकर वाहन मालिक को मिल जाएगी।
जिले में कितने वाहन और कितना काम?
1.15 लाख से अधिक कमर्शियल वाहन रजिस्टर्ड
सभी कमर्शियल वाहनों को हर साल फिटनेस अनिवार्य रूप से करानी होती है।
अभी की क्षमता
रोजाना लगभग 50 वाहन फिटनेस से गुजरते है
एटीएस शुरू होने के बाद
क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, और प्रक्रिया तेज व स्वचालित हो जाएगी।
कब और कैसे करानी होगी फिटनेस?
कमर्शियल वाहन
- नई गाड़ी: पहले 8 साल तक हर दो साल में फिटनेस
- इसके बाद: हर साल अनिवार्य
ई-रिक्शा
- नई होने पर दो साल बाद पहली फिटनेस
- इसके बाद: हर तीन साल में फिटनेस अनिवार्य
जनवरी 2026 से मैनुअल सिस्टम पूरी तरह बंद
प्रदेश के 13 जिलों में पहले से 15 एटीएस चल रहे हैं।
अब गौतमबुद्ध नगर भी इस आधुनिक तकनीक से जुड़ गया है।
1 जनवरी 2026 से पूरा मैनुअल फिटनेस सिस्टम खत्म हो जाएगा, और सिर्फ एटीएस द्वारा ही वाहनों की जांच होगी।
अधिकारी का बयान
“जिले में दो निजी एटीएस सेंटर की शुरुआत की जा रही है। अगले माह से कमर्शियल वाहनों की जांच मशीनों द्वारा होगी। इससे न सिर्फ फिटनेस प्रक्रिया तेज होगी बल्कि समय और पैसों की भी बचत होगी। सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी, क्योंकि फिटनेस पास वाहन अब पूरी तरह तकनीकी जांच के बाद ही सड़कों पर उतरेंगे।”
— नंद कुमार, एआरटीओ (प्रशासन), गौतमबुद्ध नगर