बेंगलुरु में आईटी इंजीनियर महिला को 6 महीने तक रखा डिजिटल अरेस्ट, 32 करोड़ रुपये ठग लिए
कर्नाटका के बेंगलुरु शहर में रहने वाली एक महिला आईटी इंजीनियर को साइबर अपराधियों ने 24×7 लगातार 6 महिने तक डिजिटल अरेस्ट कर 32 करोड़ रुपये ठग लिए। 15 सितंबर 2024 को महिला के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को DHL कर्मचारी बताया और कहा, आपके नाम से मुंबई में एक संदिग्ध पार्सल मिला है।जिसमें ड्रग्स और पासपोर्ट हैं। इससे पहले कि महिला कुछ समझ पाती कि कॉल को एक वरिष्ठ अधिकारी के पास ट्रांसफर कर दिया गया। जोकि वास्तव में एक साइबर ठग था। महिला के मोबाइल में स्काइप ऐप डाउनलोड करवाया गया। जिस पर खुद को साइबर क्राइम पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर ठगों ने बातचीत शुरू की। ठगों ने महिला को केस की धमकी और जांच के बहाने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। रकम वेरीफाई कराने के बहाने 6 महीने के अंदर कुल 31.83 करोड़ रुपये ठगों ने ट्रांसफर करा लिए और 26 मार्च 2025 को संपर्क तोड़ लिए। देश में अब तक का यह सबसे बड़ा डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का मामला सामने आया है। यह केस जांच के लिए सीआईडी को सौंपी जा सकती है।
बेंगलुरु साइबर थाने की पुलिस को महिला ने बताया कि ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर डरा-धमकाकर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। बेटे की शादी नज़दीक होने के कारण महिला और ज्यादा डर गई। इसके बाद ठगों ने उसके मोबाइल में स्काइप डाउनलोड करवाया और 24 घंटे कैमरा ऑन रखकर निगरानी करते रहे, खाना, ऑफिस और सोने तक सब कुछ कैमरे के सामने होता था। 23 सितंबर को महिला को एक होटल में बुलाकर वर्चुअल पूछताछ की गई। यहीं से ठगी की शुरुआत हुई। उनसे कहा गया कि RBI की FIU यूनिट के वेरिफिकेशन के लिए अपनी संपत्तियों और बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करनी होगी। छह महीनों में 187 ट्रांज़ैक्शंस के जरिए ठगों ने उससे 31.83 करोड़ रुपये निकलवा लिए। ठगों ने दिसंबर में महिला के पास फर्जी क्लियरेंस सर्टिफिकेट तक भेज दिया और भरोसा दिलाया कि फरवरी 2025 में सारी रकम वापस मिल जाएगी। इस दौरान महिला बीमार हुई और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसके बावजूद ठग उनकी निगरानी स्काइप पर जारी रही रखे। वहीं रुपये ट्रांसफर होते ही 26 मार्च 2025 को स्काइप कॉल अचानक बंद हो गई। ठगों ने नंबर स्विच ऑफ कर दिए और ईमेल का जवाब भी नहीं दिया। तब जाकर महिला समझ गई कि उसके खाते से निकला 32 करोड़ रुपये वापस नहीं आएंगे।
महिला घटना के बाद मानसिक रूप से बीमार हो गई और खुद का इलाज विदेश कराने चली गई। वापस आने के बाद महिला अपने बेटे की शादी की तैयारी में जुट गई और किसी को इस घटना के बारे में नहीं बताया।
वहीं 14 नवंबर 2025 को महिला ने FIR दर्ज कराई। हालांकि इस तरह का साइबर ठगी का मामला सामने आते ही देश की एजेंसियां भी जांच में जुटी हुई है। इतना लंबा कॉल किस देश से जारी रखा गया।
CBI अधिकारी बनकर डाली दहशत
दूसरा व्यक्ति खुद को CBI अधिकारी बताकर बात करने लगा। उसकी भाषा, टोन और पूछताछ इतनी प्रोफेशनल थी कि महिला डर गई। उसे धमकाया गया कि वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट में फंस सकती है और किसी से बात करने पर उसके परिवार खासतौर पर बेटे को खतरा हो सकता है। बेटे की शादी पास होने के कारण वह मानसिक रूप से टूट गई और ठगों की बातों पर भरोसा करने लगी।