जहरीली हवा बढ़ा रही सांसों का संकट: अस्पतालों में पांच गुना तक बढ़े फेफड़ों के मरीज
सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते एयर पॉल्यूशन का सीधा असर अब अस्पतालों पर दिखाई दे रहा है। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले कुछ हफ्तों में फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या पांच गुना तक बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि जैसे ही एक्यूआई ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में गया, मरीजों की संख्या में अचानक उछाल आया है।
सेक्टर-39 जिला अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जिनमें अधिकतर बुजुर्ग हैं जिन्हें सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो रही हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप शैलत का कहना है कि कमजोर इम्युनिटी वाले बुजुर्ग और पहले से श्वसन रोगों से ग्रसित लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
निजी अस्पतालों में भी हालात कम चुनौतीपूर्ण नहीं हैं। मेदांता नोएडा के डॉक्टरों के अनुसार, पिछले एक महीने में खांसी, घरघराहट, सांस फूलने और सीने में जलन वाले मरीजों की संख्या में 30% वृद्धि दर्ज की गई है। जो मरीज एक महीने पहले सर्जरी के बाद ठीक थे, वे अब फिर से गंभीर रेस्पिरेटरी दिक्कतों के साथ लौट रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, PM 2.5 और PM 10 कण फेफड़ों की गहराई तक जाकर सूजन, संक्रमण और लंबे समय में खतरनाक बीमारियां बढ़ा रहे हैं।
यथार्थ अस्पताल सेक्टर-110 के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरुणाचलम एम बताते हैं कि वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद ओपीडी में सांस से जुड़े मरीजों में 40% की बढ़ोतरी हुई है। इनमें से 30% मरीज केवल प्रदूषण से प्रभावित थे, जबकि 70% पहले से श्वसन बीमारियां झेल रहे थे जिनकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर ने बताया कि बारिश या हवा न चलने के कारण धूल और धुआं नीचे जम जाता है, जिससे फेफड़ों पर लगातार दबाव बढ़ता है।
कैलाश अस्पताल की डॉ. ए.एस. संध्या के अनुसार, PM₁₀ के सूक्ष्म कण नाक-गले से होते हुए फेफड़ों तक पहुंचकर सूजन और संक्रमण बढ़ाते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक तक का खतरा बढ़ जाता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में अधिकतर बुजुर्ग और बच्चे हैं, जो इस समय सबसे संवेदनशील श्रेणी में आते हैं।
बचाव कैसे करें?
विशेषज्ञों ने प्रदूषण से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं—
N95 मास्क का उपयोग करें
घर में एयर-प्यूरीफायर जरूर चलाएं
सुबह-शाम बाहरी गतिविधियां कम करें
विटामिन-C, एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 का सेवन बढ़ाएं
आहार में आंवला, अदरक, हल्दी, ब्रोकली, नींबू शामिल करें