शोर और प्रदूषण से दूर सुकून की तलाश: ओखला बर्ड सेंचुरी में पर्यटकों की बंपर बढ़ोतरी
शहर के शोर-शराबे और प्रदूषण के बीच लोग सुकून की तलाश में प्राकृतिक स्थलों का रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में नोएडा स्थित ओखला बर्ड सेंचुरी इन दिनों लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। सात समंदर पार से आए प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस बार पर्यटकों की संख्या पांच गुना अधिक बढ़ी है। जहाँ कुछ महीने पहले रोजाना सिर्फ 300 से 500 पर्यटक आते थे, वहीं अब यह संख्या 2,500 से 3,000 प्रतिदिन पहुंच चुकी है।
सर्दी की आहट के साथ ही यहां के शांत, हरियाली भरे वातावरण में लोग सुकून भरे पल बिताने आते हैं। डीएफओ रजनीकांत मित्तल बताते हैं कि वर्तमान में ओखला विहार में छह प्रकार के प्रवासी पक्षी दिखाई दे रहे हैं। इनमें बारबेट गुड, गर्ल गुज, नॉर्दन सोलवर, ब्लैक नेक स्टॉर्क, कॉमन टील और पेटेंट स्टंप प्रमुख हैं। अब तक तीन से चार हजार प्रवासी पक्षी यहां नजर आए हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट 350 रुपये तथा भारतीय पर्यटकों के लिए 30 रुपये निर्धारित है।
ओखला बर्ड सेंचुरी के अधिकारी अमित गुप्ता के अनुसार, यहां 188 से अधिक पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें 121 तरह की जड़ी-बूटियां, 10 झाड़ियों की प्रजातियां, 30 पेड़ों की प्रजातियां, 9 बेलों की किस्में और 16 प्रकार की घासें शामिल हैं। सेंचुरी में लगभग 10 पक्षी प्रजातियां ऐसी हैं जो खतरे में हैं—कुछ गंभीर रूप से संकटग्रस्त और कुछ लगभग संकटग्रस्त। यहां अब तक 320 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 20 जल पक्षी, 44 जंगलों में रहने वाले पक्षी, 43 प्रवासी जल पक्षी और 26 प्रवासी जंगल पक्षी शामिल हैं।
सिर्फ पक्षी ही नहीं, यहां नीलगाय, इंडियन नेवला, काला-गला खरगोश, सियार समेत करीब 10 स्तनधारी प्रजातियां भी मिलती हैं। इसके अलावा 8 प्रकार के सांप, छिपकली जैसे सरीसृप और 2 प्रकार के मेंढक भी यहां पाए जाते हैं। यह स्थान भारत के 466 इंटरनेशनल बर्ड एरिया में से एक है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वहीं पर्यटक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में 69,445, जबकि 2021 में 64,268 विजिटर्स ने सेंचुरी का भ्रमण किया। अधिकारियों का कहना है कि हर साल पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सेंचुरी में घूमने के लिए कुछ जरूरी नियम भी हैं। सबसे पहला गोल्डन रूल—चुपचाप रहकर घूमना, ताकि पक्षियों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। पक्षियों को परेशान करने पर जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही, कैमरा और बाइनोक्यूलर लेकर जाने पर भी रोक है। यहां विजिटर्स की सहायता के लिए फील्ड गाइड उपलब्ध रहता है।