लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने कहा— राजनीति छोड़ रही हूँ, परिवार से भी संबंध तोड़ रही हूँ; RJD की बड़ी हार के अगले ही दिन बड़ा बयान
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के एक दिन बाद पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और अपने परिवार से रिश्ते तोड़ने की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में सनसनी मचा दी है। महागठबंधन जहां 243 में से केवल 35 सीटों पर सिमट गया, वहीं RJD की सीटें भी 75 से घटकर 24 पर आ गईं।
X पोस्ट में लिखा— ‘मैं राजनीति छोड़ रही हूँ, परिवार को भी त्याग रही हूँ’
रोहिणी आचार्य ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:
“मैं राजनीति छोड़ रही हूँ और अपने परिवार से भी संबंध तोड़ रही हूँ। यह वही है जो संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे कहा…and I am taking all the blame.”
उनकी यह पोस्ट सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
बताया जा रहा है कि रोहिणी लंबे समय से पार्टी के भीतर बढ़ते विवादों और निर्णयों से नाखुश थीं।
कौन हैं संजय यादव और रमीज़?
संजय यादव: RJD के राज्यसभा सांसद और तेजस्वी यादव के बेहद करीबी।
रमीज़: तेजस्वी के पुराने मित्र, जो उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से आते हैं।
सूत्रों के अनुसार, चुनाव से पहले आंतरिक खींचतान तेज हो गई थी और रोहिणी खुलकर संजय यादव की बढ़ती पकड़ की आलोचना कर रही थीं।
सोशल मीडिया पर पिता और भाई को अनफॉलो किया था
बीते महीने रोहिणी ने अचानक अपने पिता लालू प्रसाद और भाई तेजस्वी यादव को X पर अनफॉलो कर दिया था। यह कदम भी संकेत माना गया था कि परिवार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव की पार्टी से निष्कासन के बाद परिवार में खटास और बढ़ गई थी।
कौन हैं रोहिणी आचार्य?
पेशे से डॉक्टर
सिंगापुर में अपने NRI पति के साथ रहती हैं
उन्होंने कुछ वर्ष पहले अपने पिता लालू प्रसाद को किडनी डोनेट कर सुर्खियाँ बटोरी थीं
चुनाव के दौरान वे तेजस्वी के लिए लगातार प्रचार कर रही थीं
उनके इस बड़े फैसले ने RJD के भीतर उथल-पुथल को और गहरा कर दिया है।
बिहार चुनाव में RJD को बड़ा झटका
इस चुनाव में:
RJD की सीटें: 75 से घटकर 24
महागठबंधन: कुल 35 सीटों पर सिमटा
NDA: राज्य में रिकॉर्ड स्तर की मजबूत स्थिति
महागठबंधन की यह हार कांग्रेस और RJD दोनों के लिए करारा झटका मानी जा रही है।
क्या रोहिणी का फैसला RJD की स्थिति और कमजोर करेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
लगातार परिवारिक विवाद
नेतृत्व पर सवाल
और चुनावी रणनीति की विफलता
इन सबने RJD को एक गंभीर मोड़ पर ला खड़ा किया है।
रोहिणी के राजनीति से हटने और परिवार से दूरी बनाने का असर पार्टी की छवि और एकजुटता पर और गहरा पड़ सकता है।